Ageas Group के CEO Hans De Cuyper ने बताया कि भारत कंपनी के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है। वे मौजूदा ऑपरेशंस को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। कंपनी की वर्तमान स्थिति लाइफ इंश्योरेंस में लगभग 12वें स्थान (Ageas Federal Life) पर और नॉन-लाइफ में 15वें स्थान (Royal Sundaram General Insurance) पर है। इन व्यवसायों को पार्टनर Federal Bank के साथ मिलाकर Ageas भारत में अपनी ग्रोथ को रफ्तार देना चाहता है।
CEO Hans De Cuyper ने यह भी साफ किया कि कंपनी मौजूदा ऑपरेशंस से पीछे हटने के बजाय उन्हें बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण (Acquisitions) या बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। De Cuyper ने कहा कि Ageas का निवेश का नजरिया लॉन्ग-टर्म है और जब तक कैपिटल डिप्लॉयमेंट से अच्छा रिटर्न मिल रहा है, तब तक IPO या डिवेस्टमेंट (Divestment) की कोई योजना नहीं है।
बैनकॉश्योरेंस (Bancassurance), यानी बैंकों के जरिए बीमा प्रोडक्ट्स बेचना, Ageas की भारत की रणनीति का एक मुख्य स्तंभ है। De Cuyper ने इस मॉडल का बचाव करते हुए स्वीकार किया कि मिस-सेलिंग (Mis-selling) की चिंताएं हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ये समस्याएं केवल बैनकॉश्योरेंस तक सीमित नहीं हैं और बैंक कंबाइंड फाइनेंशियल एडवाइस देने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म हैं। Ageas रिटायरमेंट और पेंशन बाज़ारों में भी बड़े अवसर देख रहा है और अगर सही मौके मिलते हैं तो इन क्षेत्रों में विस्तार करने के लिए भी खुला है।
मार्केट वैल्यूएशन को लेकर CEO De Cuyper का मानना है कि भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में मौजूदा ऊंचे मल्टीपल्स (High Multiples) केवल हवा-हवाई नहीं हैं, बल्कि ये मजबूत ग्रोथ की संभावनाओं को दर्शाते हैं। उनका अनुमान है कि जैसे-जैसे ऑपरेशनल स्केल बढ़ेगा, बिजनेस के फिक्स्ड कॉस्ट के कारण मार्जिन्स में सुधार होगा। Ageas उच्च-मार्जिन वाले प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की ओर रणनीतिक बदलाव का भी समर्थन करता है।
Ageas ने हालिया रेगुलेटरी बदलावों, जैसे कि रिस्क-बेस्ड कैपिटल (Risk-based Capital) और IFRS 17 स्टैंडर्ड्स, का स्वागत किया है। कंपनी का मानना है कि ये बदलाव ट्रांसपेरेंसी (Transparency) को बढ़ाएंगे और लॉन्ग-टर्म इंश्योरेंस परफॉरमेंस की अधिक स्पष्ट समझ प्रदान करेंगे।
