Q1 FY27 नतीजों के बाद, Wright Research ने फाइनेंशियल्स और ऑटो एनासिलरीज में निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। वहीं, सीमेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से दूरी बनाने को कहा है। मजबूत ऑर्डर बुक वाले इंडस्ट्रियल्स और टेलीकॉम व फार्मा सेक्टर में स्थिर मांग को देखते हुए यह रणनीति बनाई गई है।
क्यों इंडस्ट्रियल्स और टेलीकॉम पर दांव?
Q1 FY27 की कमाई के नतीजों के बाद, निवेश रिसर्च फर्म Wright Research ने अपनी पोर्टफोलियो रणनीति को अपडेट किया है। फर्म ने उन सेक्टर्स पर फोकस किया है जिनमें कमाई की अच्छी झलक दिख रही है। कंपनी ने इंडस्ट्रियल्स, टेलीकॉम और फार्मा को मुख्य रुचि के क्षेत्र बताया है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और सीमेंट से दूरी बनाने का सुझाव दिया है।
इंडस्ट्रियल्स सेक्टर में कंपनियों की मजबूत ऑर्डर बुक और उनसे लगातार बढ़ते रेवेन्यू कन्वर्जन के कारण इसे खास तवज्जो मिल रही है। खासकर डिफेंस, पावर ट्रांसमिशन और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ साफ दिख रही है। इसका मतलब है कि कंपनियों के पास जो काम पहले से है, वह अब असल कमाई में बदल रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
वहीं, टेलीकॉम सेक्टर में ग्राहकों से होने वाली औसत कमाई (ARPU) में बढ़ोतरी से प्रदर्शन स्थिर बना हुआ है। 5G का तेजी से प्रसार और डोमेस्टिक प्राइसिंग पावर के साथ, टेलीकॉम कंपनियां लागत बढ़ने के बावजूद दूसरे सेक्टर्स की तुलना में ज्यादा स्थिर साबित हो रही हैं। फार्मा सेक्टर में भी डोमेस्टिक डिमांड अच्छी बनी हुई है। इन कंपनियों को एक्सपोर्ट से भी फायदा मिल रहा है, जो करेंसी के अनुकूल रुझानों से और मजबूत हुआ है।
पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव
फर्म ने फाइनेंशियल कंपनियों और ऑटो एनासिलरीज में हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दी है। ऑटो एनासिलरीज को ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) से ज्यादा तरजीह देने का कारण Q1 के नतीजे हैं। जहां कई पैसेंजर व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ी हुई इनपुट लागत और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, वहीं ऑटो एनासिलरीज ने बेहतर प्राइसिंग पावर और एक्सपोर्ट व डिफेंस से जुड़े ऑर्डर्स जैसे विविध रेवेन्यू स्ट्रीम दिखाए।
इसके विपरीत, रणनीति सीमेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में हिस्सेदारी कम करने की है। इन सेक्टर्स का प्रदर्शन जून तिमाही के नतीजों के बाद कमजोर हुआ है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों ने कच्चे तेल के बाजारों को अस्थिर कर दिया है, जिससे इनपुट लागत बढ़ गई है और सीमेंट व केमिकल सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ा है।
बाजार की मजबूती और आगे का नज़रिया
वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के बावजूद, भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई है। निफ्टी कंपनियों ने पहली तिमाही में लगभग 10% का प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज किया, जबकि सेंसेक्स कंपनियों ने लगभग 5% की ग्रोथ देखी। मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों ने विशेष रूप से अच्छा प्रदर्शन किया, जिसका मुख्य कारण उनका डोमेस्टिक मार्केट पर फोकस रहा, जिसने उन्हें इम्पोर्टेड रॉ मैटेरियल्स से जुड़ी अस्थिरता से बचाया।
आगे चलकर, लार्ज-कैप स्टॉक्स के लिए व्यापक रिकवरी FY27 के अंत या FY28 में आने की उम्मीद है। यह संभावित सुधार कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें कच्चे तेल की कीमतों का स्थिर होना शामिल है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन में सुधार होगा, और अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित गिरावट से विदेशी पूंजी का इनफ्लो बढ़ सकता है। फिलहाल, फोकस उन कंपनियों और सेक्टर्स की ओर बढ़ रहा है जो सकारात्मक अर्निंग ट्रेंड दिखा रहे हैं, न कि पूरी तरह से बाजार में रिकवरी की उम्मीद पर दांव लगाने पर। निवेशक आगे भी इस बात पर नजर रख सकते हैं कि ये सेक्टर्स लागत के दबाव का प्रबंधन कैसे करते हैं और वित्तीय वर्ष आगे बढ़ने के साथ मांग कैसे बनाए रखते हैं।
