West Coast Paper Mills के शेयर ने आज ₹909.70 का ऑल-टाइम हाई छू लिया है। पिछले सात महीनों में स्टॉक **133%** उछल चुका है। रेवेन्यू में गिरावट के बावजूद कंपनी के मुनाफे में आई जबरदस्त तेजी और ऑप्टिकल फाइबर बिजनेस में कदम रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा जीत लिया है।
बुधवार को West Coast Paper Mills का शेयर ₹909.70 के नए शिखर पर पहुंच गया। इस रैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सात महीनों में यह शेयर 133% तक दौड़ चुका है। बाजार में इस स्टॉक को लेकर जबरदस्त उत्साह है, जिसका सबूत आज का 1.4 मिलियन शेयरों का ट्रेडिंग वॉल्यूम है।
मुनाफे की अनोखी कहानी
कंपनी के फाइनेंशियल रिजल्ट्स काफी दिलचस्प हैं। जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 16% कम हुआ, लेकिन इसके बावजूद नेट प्रॉफिट 163% उछलकर ₹141.84 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, EBITDA में 55% का सुधार देखने को मिला। मैनेजमेंट का कहना है कि उन्होंने ऑपरेशंस को एफिशिएंट बनाया है और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर फोकस शिफ्ट किया है, जिससे मार्जिन सुरक्षित रहे।
बिजनेस में बड़ा बदलाव
कंपनी अब सिर्फ पेपर बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। अपनी सब्सिडियरी 'West Coast Optilinks' के जरिए कंपनी अब ऑप्टिकल फाइबर केबल के बाजार में उतर चुकी है। हैदराबाद में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से कंपनी भारतनेट और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का फायदा उठाना चाहती है। यह कदम पेपर इंडस्ट्री की साइक्लिकल (Cyclical) उतार-चढ़ाव वाली प्रकृति से बचने के लिए एक बड़ा बफर साबित हो सकता है।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, पेपर सेक्टर की राह आसान नहीं है। सस्ते पेपर का इम्पोर्ट घरेलू कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डालता है। इसके अलावा, कच्चे माल (जैसे वुड पल्प और केमिकल्स) की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं।
बड़े निवेशकों का दांव
स्टॉक के प्रति आकर्षण का एक कारण बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी भी है। 30 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, मशहूर निवेशक मुकुल महावीर अग्रवाल के पास कंपनी के 9.5 लाख शेयर यानी 1.44% हिस्सेदारी है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने फाइबर ऑप्टिक्स प्रोजेक्ट को कितनी कुशलता से एग्जीक्यूट करती है और पेपर डिवीजन में लागत अनुशासन कैसे बनाए रखती है।
