Welspun Enterprises Share: रेवेन्यू और मुनाफे में आई भारी गिरावट, पर ₹20,000 Cr का ऑर्डर बुक बना बड़ा सहारा!

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Author Aditya Rao | Published at:
Welspun Enterprises Share: रेवेन्यू और मुनाफे में आई भारी गिरावट, पर ₹20,000 Cr का ऑर्डर बुक बना बड़ा सहारा!
Overview

Welspun Enterprises के निवेशकों के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में **12%** की साल-दर-साल (YoY) गिरावट आई है, जो **₹787 करोड़** रहा। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी **60%** गिरकर **₹31 करोड़** पर आ गया।

Welspun Enterprises Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कुछ चुनौतियों का सामना किया। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 12% घटकर ₹787 करोड़ रहा। वहीं, नौ महीनों (9 Months) की अवधि के लिए रेवेन्यू 9% YoY गिरकर ₹2,416 करोड़ दर्ज किया गया। मैनेजमेंट का कहना है कि यह गिरावट बाहरी वजहों से है, जैसे कि लंबे मॉनसून और धरवी-घाटकोपर टनल जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी क्लीयरेंस में देरी। पुणे-शिरुर प्रोजेक्ट के अवार्ड में देरी भी एक कारण रहा।

टॉप-लाइन में गिरावट के बावजूद, कंपनी की ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी (Operational Profitability) में मजबूती दिखी। नौ महीनों के लिए कंसोलिडेटेड EBITDA में 10% YoY का इजाफा हुआ और यह ₹573 करोड़ पर पहुंच गया। सबसे खास बात यह है कि EBITDA मार्जिन में जबरदस्त सुधार हुआ, जो 386 बेस पॉइंट बढ़कर 23.1% हो गया, जबकि पिछले साल यह 19.2% था। हालांकि, सिर्फ Q3 FY26 के लिए, EBITDA में 3% YoY की मामूली गिरावट आई और यह ₹174 करोड़ रहा, लेकिन मार्जिन 192 बेस पॉइंट बढ़कर 21.5% हो गया।

वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में बड़ी गिरावट देखने को मिली। Q3 FY26 के लिए कंसोलिडेटेड PAT 60% YoY गिरकर ₹31 करोड़ पर आ गया। नौ महीनों में PAT 7% YoY घटकर ₹230 करोड़ रहा। इस भारी गिरावट की एक बड़ी वजह AWEL में ₹49 करोड़ के एक्सेप्शनल लॉस (Exceptional Loss) को माना जा रहा है, जो कंपनी के कुच ऑयल ब्लॉक के राइट-ऑफ (Write-off) से संबंधित है।

इन चुनौतियों के बीच, Welspun Enterprises अपनी '3G' (Growth, Governance, and Green) स्ट्रैटेजी के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ पर फोकस कर रही है। कंपनी ने FY26 के लिए ₹3,600-3,700 करोड़ का रेवेन्यू गाइडेंस दिया है और अपने EBITDA टारगेट्स को पूरा करने को लेकर आश्वस्त है।

सबसे बड़ी खुशखबरी है कंपनी की ऑर्डर बुक (Order Book)। उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक यह ₹20,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी। नए प्रोजेक्ट्स जैसे पंजरपुर (Panjrapur) और पुणे-शिरुर (Pune-Shirur) से ही ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का एड-ऑन मिलने की उम्मीद है।

फाइनेंशियल मोर्चे पर, कंपनी की कंसोलिडेटेड नेट वर्थ बढ़कर ₹3,148 करोड़ हो गई है, जो पहले ₹2,709 करोड़ थी। हालांकि, कंसोलिडेटेड ग्रॉस डेट बढ़कर ₹1,865 करोड़ (पहले ₹1,300 करोड़) हो गया है, जबकि कैश और इक्विवेलेंट्स भी बढ़कर ₹1,399 करोड़ (पहले ₹1,155 करोड़) हो गए हैं। इससे कंसोलिडेटेड नेट डेट बढ़कर ₹466 करोड़ (पहले ₹145 करोड़) हो गया है, और डेट-इक्विटी रेशियो 0.70x पर है। वहीं, स्टैंडअलोन (Standalone) बेसिस पर कंपनी के पास ₹1,174 करोड़ का मजबूत नेट कैश है और डेट-इक्विटी रेशियो सिर्फ 0.10x है।

निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाली एक और खबर यह है कि CRISIL ने Welspun Enterprises की रेटिंग आउटलुक को 'Stable' से बदलकर 'Positive' कर दिया है। कंपनी की लॉन्ग-टर्म रेटिंग CRISIL AA- और शॉर्ट-टर्म रेटिंग CRISIL A1+ बरकरार रखी गई है। कंपनी को लगातार दूसरे साल 'Great Place to Work' का सर्टिफिकेशन भी मिला है।

कंपनी के सामने मुख्य जोखिम प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Project Execution) में देरी और साइट वर्क पर मॉनसून का असर है। निवेशक अब बढ़ती ऑर्डर बुक को समय पर रेवेन्यू में बदलते हुए देखना चाहेंगे। साथ ही, कंपनी को ग्रोथ पहलों को फंड करते हुए बढ़ते कर्ज को मैनेज करना होगा। CRISIL की पॉजिटिव आउटलुक और मजबूत ऑर्डर बुक पाइपलाइन आने वाले सालों में रेवेन्यू में तेजी लाने की उम्मीद जगाती है।

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