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Welspun Corp Target: **1,082** का लक्ष्य, पर शेयर पर दबाव क्यों?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Welspun Corp Target: **1,082** का लक्ष्य, पर शेयर पर दबाव क्यों?
Overview

Welspun Corp के लिए Nuvama International Equities ने टारगेट प्राइस बढ़ाकर **₹1,082** कर दिया है। कंपनी के पास **₹24,700 करोड़** की शानदार ऑर्डर बुक और स्ट्रैटेजिक डाइवर्सिफिकेशन है। हालांकि, Q3 FY26 में नेट प्रॉफिट **33%** गिर गया, जिससे शेयर पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज का भरोसा, पर शेयर की चाल क्यों धीमी?

Nuvama International Equities ने Welspun Corp पर 'Buy' रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और शेयर के लिए ₹1,082 का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह मौजूदा भाव से करीब 33% की तेजी का संकेत देता है। ब्रोकरेज फर्म का यह भरोसा कंपनी की ₹24,700 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक पर टिका है, जिसमें अमेरिका से ₹1,000 करोड़ का बड़ा ऑर्डर भी शामिल है। मैनेजमेंट का कहना है कि नए एरिया जैसे डक्टाइल आयरन (DI) पाइप्स में विस्तार और अलग-अलग जगहों पर प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाना ग्रोथ के मुख्य ड्राइवर होंगे।

प्रॉफिट में आई गिरावट, शेयर लाल निशान में?

इन पॉजिटिव बातों के बावजूद, Welspun Corp का शेयर पिछले 12 महीनों में 4.5% और पिछले 5 दिनों में 0.5% तक गिर चुका है। यह दिखाता है कि निवेशक सिर्फ ऑर्डर बुक देखकर खुश नहीं हैं। उन्हें कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन को लेकर चिंता है।

Q3 FY26 में, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़कर ₹4,532 करोड़ हो गया। लेकिन, नेट प्रॉफिट 33% घटकर ₹453 करोड़ पर आ गया। प्रॉफिट में यह बड़ी गिरावट पिछले साल के एसेट सेल के हाई बेस के कारण भी थी, लेकिन यह दिखाती है कि कंपनी का मुनाफा बाहरी फैक्टर और नए बिजनेस को इंटीग्रेट करने के खर्चों के प्रति कितना सेंसिटिव है।

डाइवर्सिफिकेशन और भविष्य की राह

Welspun Corp अब सिर्फ ऑयल और गैस पाइप बनाने वाली कंपनी से आगे बढ़कर एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बनने की राह पर है। कंपनी ने DI पाइप कैपेसिटी बढ़ाई है, Sintex-BAPL के अधिग्रहण के जरिए B2C मार्केट में एंट्री की है, और TMT रीबार्स व स्टेनलेस स्टील सेगमेंट में भी विस्तार कर रही है। यह स्ट्रेटेजी सीजनल उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद करेगी, जिसमें सऊदी अरब के 60% से ज्यादा ऑर्डर स्टेबल वॉटर सेक्टर से हैं। अमेरिका में डेटा सेंटर और नेचुरल गैस इंफ्रास्ट्रक्चर से डिमांड बढ़ रही है, वहीं भारत में 'जल जीवन मिशन' और गैस नेटवर्क के विस्तार से भी कंपनी को फायदा होने की उम्मीद है।

मार्जिन और एक्जीक्यूशन पर सवाल

हालांकि, कुछ चिंताएं भी हैं। Q3 में नेट प्रॉफिट में 33% की गिरावट, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, गिरते प्रॉफिट मार्जिन की ओर इशारा करती है। स्टील और आयरन ओर जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से यह स्थिति और बिगड़ सकती है। साथ ही, नए एरिया में कंपनी का विस्तार और Sintex-BAPL जैसे अधिग्रहण को इंटीग्रेट करने में एक्जीक्यूशन का रिस्क भी है। कंपनी के शेयर का पिछला परफॉरमेंस दिखाता है कि निवेशक पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं कि डाइवर्सिफिकेशन और नए ऑर्डर से लंबी अवधि में इतना प्रॉफिट होगा कि वह मौजूदा वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

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