Renewable energy कंपनी Waaree Energies, जो भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा नाम है, ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, Waaree Clean Energy Solutions, ने Zero Footprint Industries Ltd (ZFI) के साथ एक अहम् 15 साल का 'इलेक्ट्रोलाइजर एज ए सर्विस' (EAAS) समझौता किया है। इस डील के तहत 2.5 MW क्षमता का अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम ZFI को मुहैया कराया जाएगा।
यह सिर्फ शुरुआत है, क्योंकि दोनों कंपनियों के बीच एक और मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन हुआ है। इस MoU के तहत, EAAS मॉडल के ज़रिए ZFI को उत्तर भारत में कई ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त 50 MW इलेक्ट्रोलाइजर सप्लाई किए जाएंगे। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ZFI को ग्रे हाइड्रोजन से ग्रीन हाइड्रोजन की ओर ले जाना और देश की ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
इस 2.5 MW के प्रोजेक्ट से सालाना करीब 41 लाख Nm3 ग्रीन हाइड्रोजन और 20 लाख Nm3 ग्रीन ऑक्सीजन का उत्पादन होने का अनुमान है। पहले इलेक्ट्रोलाइजर की डिलीवरी Q2 फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में होने की उम्मीद है, और कमर्शियल ऑपरेशंस Q3 फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक शुरू हो जाने चाहिए।
Waaree Energies के लिए यह EAAS मॉडल लंबी अवधि के लिए एक स्थिर और अनुमानित रेवेन्यू स्ट्रीम का जरिया बनेगा। यह सहयोग कंपनी को अपनी एडवांस्ड इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी और मजबूत ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) स्किल्स को तेज़ी से उभरते ग्रीन हाइड्रोजन मार्केट में प्रदर्शित करने का मौका देगा। यह पहल भारत के नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्यों और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। कंपनी पहले ही 300 MW की इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए प्लान अप्रूव कर चुकी है और NGHM के तहत PLI स्कीम का लाभ भी उठा रही है।