EAAS मॉडल: रेवेन्यू की नई धारा
यह नई 'Electrolyzer-as-a-Service' (EAAS) डील Waaree Clean Energy Solutions और Zero Footprint Industries (ZFI) के बीच हुई है, जो ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में एक नया बेंचमार्क स्थापित कर सकती है। इस मॉडल के तहत, Waaree सिर्फ एक इक्विपमेंट सप्लायर (equipment supplier) बनकर नहीं रहेगी, बल्कि ग्राहकों के साथ एक लंबे समय तक चलने वाली पार्टनरशिप में प्रवेश करेगी। इससे कंपनी को हर महीने एक तय आमदनी (Recurring Revenue) मिलने का भरोसा है। Waaree, ZFI के लिए उत्तर प्रदेश में 2.5 MW की क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन सिस्टम को डिजाइन, इंस्टॉल, ऑपरेट और मेंटेन करेगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ZFI जैसी कंपनियों को भारी पूंजी लगाए बिना ग्रीन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिल सकेगी, जो मेंथा ऑयल, केमिकल, स्टील और फार्मा जैसी इंडस्ट्रीज के लिए एक बड़ा बूस्ट है।
पॉलिसी का साथ और विस्तार की योजना
इस 15 साल के कॉन्ट्रैक्ट के तहत, Waaree अपने गुजरात स्थित प्लांट में निर्मित 2.5 MW के अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम को खुद ऑपरेट करेगी और ZFI को उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन व ऑक्सीजन की सप्लाई करेगी। यह प्रोजेक्ट फाइनेंशियल ईयर 2027 की तीसरी तिमाही (Q3 FY27) तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। इससे सालाना करीब 41 लाख Nm3 ग्रीन हाइड्रोजन और 20 लाख Nm3 ग्रीन ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। इतना ही नहीं, एक और बड़े मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) के तहत 50 MW तक की क्षमता वाले इलेक्ट्रोलाइजर के लिए भी EAAS मॉडल पर विस्तार की योजना है, जो पूरे उत्तरी भारत में Waaree की पहुंच बढ़ा सकती है। Waaree अगले पांच सालों में अपनी क्षमता को 500 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 10,000 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना बना रही है। यह सर्विस-आधारित मॉडल, जहां Waaree को एक फिक्स रेवेन्यू मिलता है, पारंपरिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) मॉडल से काफी अलग है और कंपनी के लिए अधिक अनुमानित कमाई का जरिया बनेगा। स्टॉक मार्केट में, Waaree Energies (WAAREEENER.NS) का शेयर सोमवार को ₹2,917.10 के स्तर पर बंद हुआ था, और इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 24.47 से 29.2 के बीच चल रहा है।
सरकारी नीतियों का सहारा
यह नई डील भारत सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) और उत्तर प्रदेश की ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी 2024 के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। उत्तर प्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट को खास प्रोत्साहन दे रही है, जिसमें कैपिटल सब्सिडी और बिजली व ट्रांसमिशन चार्ज में महत्वपूर्ण छूट शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर, भारत सरकार 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर ₹4,440 करोड़ का प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) दिया जा रहा है। इस ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन कम करने (decarbonize) और ट्रांसपोर्टेशन को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एग्जीक्यूशन के जोखिम और कॉम्पिटिशन
हालांकि, इस नए EAAS मॉडल की सफलता Waaree की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ZFI की निरंतर मांग पर निर्भर करेगी। 500 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा से 10,000 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा तक तेजी से क्षमता बढ़ाना एक बड़ी एग्जीक्यूशन (execution) चुनौती पेश कर सकता है, जो कंपनी के कैपिटल रिसोर्सेज (capital resources) और ऑपरेशनल मैनेजमेंट पर दबाव डाल सकती है। भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में Reliance Industries, Adani Group और NTPC जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी भारी निवेश कर रहे हैं और $1/kg से कम कीमत पर हाइड्रोजन बेचने का लक्ष्य रख रहे हैं। L&T Electrolysers जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं स्थापित कर रही हैं। Waaree की मुख्य ताकत सोलर PV मैन्युफैक्चरिंग में रही है, लेकिन इलेक्ट्रोलाइजर सर्विस जैसे जटिल सेगमेंट में उसे खुद को बड़े पैमाने पर साबित करना होगा।
भविष्य का रास्ता
विश्लेषकों (Analysts) की बात करें तो, Waaree Energies के भविष्य को लेकर उनका नजरिया आम तौर पर सकारात्मक है। औसतन, उन्होंने 12 महीने के लिए ₹3,422.73 का टारगेट प्राइस सुझाया है। यह उम्मीद कंपनी के ग्रीन हाइड्रोजन जैसे हाई-ग्रोथ वाले सेक्टर्स में विस्तार करने और सोलर एनर्जी में अपनी स्थापित उपस्थिति के कारण है, जिसे भारत के आक्रामक क्लीन एनर्जी टारगेट्स का समर्थन प्राप्त है। यदि EAAS मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह Waaree के लिए एक महत्वपूर्ण 'रिकरिंग रेवेन्यू' का स्रोत खोल सकता है और कंपनी को एक संपूर्ण क्लीन एनर्जी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर के रूप में स्थापित कर सकता है। बाजार को अगले 5 साल में कंपनी की कमाई में 113% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) की उम्मीद है, साथ ही कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) ट्रैक रिकॉर्ड भी मजबूत रहा है। सरकार का डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने पर निरंतर फोकस, जिसमें PLI और पॉलिसी सपोर्ट शामिल हैं, इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी और संबंधित सेवाओं की मांग को बनाए रखेगा। इससे Waaree जैसी कंपनियों के लिए एक अनुकूल माहौल बनेगा, जो ऑपरेशनल और कॉम्पिटिटिव चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
