यह ₹3,900 करोड़ का निवेश कंपनी की सब्सिडियरी Waaree Green Glass Private Limited के ज़रिए किया जाएगा, और इस प्लांट की क्षमता 2,500 टन प्रति दिन होगी। यह पैसा डेट (debt) और कंपनी की अपनी कमाई (internal accruals) से जुटाया जाएगा। इसका मुख्य मकसद वर्टिकल इंटीग्रेशन (vertical integration) को मज़बूत करना है, ताकि सोलर पैनल बनाने के लिए ज़रूरी कच्चे माल (raw material) की सप्लाई सुनिश्चित हो सके, बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम हो और लागत पर बेहतर कंट्रोल रहे।
हालिया ट्रेडिंग सत्र में, Waaree Energies के शेयर ₹3,085.85 पर बंद हुए, जो 0.74% की बढ़ोतरी है। स्टॉक अपने 52-हफ्ते के हाई ₹3,864.40 से करीब 20% नीचे कारोबार कर रहा है, और इसकी मार्केट कैप लगभग ₹88,761.67 करोड़ है।
सोलर ग्लास प्लांट के अलावा, Waaree Energies ने अपनी एक और सब्सिडियरी, Waaree Transpower Private Limited में अपनी हिस्सेदारी को 64.04% से बढ़ाकर 75.10% कर लिया है। इस एक्विजिशन (acquisition) पर कंपनी ने ₹190 करोड़ खर्च किए हैं। यह कदम ग्रुप के अंदर कंट्रोल को मज़बूत करेगा और फैसलों को आसान बनाएगा, जिससे बेहतर परफॉर्मेंस और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग हो सकेगी।
कंपनी का यह बड़ा कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का सोलर मार्केट ज़बरदस्त ग्रोथ (growth) दिखा रहा है। अनुमान है कि 2026 में 42.5 गीगावाट (GW) की सोलर क्षमता जोड़ी जाएगी। हालांकि, इस बड़े निवेश से कंपनी पर फाइनेंशियल लिवरेज (financial leverage) बढ़ेगा, जिस पर निवेशकों की नज़र रहेगी। ₹3,900 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) का एक हिस्सा कर्ज (debt) से आएगा, जिससे कंपनी का फाइनेंशियल रिस्क (financial risk) बढ़ सकता है, खासकर अगर मार्केट की स्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं या प्रोजेक्ट एक्ज़ीक्यूशन (project execution) में देरी होती है। Waaree Energies का फिलहाल P/E रेश्यो (P/E ratio) करीब 26x-27x है, जो कि सेक्टर की दूसरी कंपनियों जैसे Solar Industries India (जिसका P/E 85.4x है) की तुलना में ठीक लगता है।
विश्लेषकों (analysts) का नजरिया मोटे तौर पर पॉजिटिव है, लेकिन कुछ 'Buy' रेटिंग और टारगेट प्राइस के साथ कुछ 'Sell' रेटिंग भी दे रहे हैं। कंपनी की भविष्य की सफलता उसके एक्सपेंशन प्लान्स (expansion plans) के सफल एक्ज़ीक्यूशन (execution) और बढ़े हुए कर्ज के मैनेजमेंट पर निर्भर करेगी।