कंसोलिडेटेड नतीजों पर एक नज़र:
WPIL Limited ने FY26 की तीसरी तिमाही में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 41% बढ़कर ₹539 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, EBITDA में 134% की ज़बरदस्त ग्रोथ के साथ यह ₹113 करोड़ रहा। कंपनी की EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 20.88% हो गई। सबसे खास बात यह है कि नेट प्रॉफिट (Profit After Tax - PAT) 104% की बड़ी छलांग लगाकर ₹76 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि PAT मार्जिन 14.03% रहा।
9 महीने के नतीजे और स्टैंडअलोन प्रदर्शन:
अगर पिछले 9 महीनों (9 Months FY26) के नतीजों पर गौर करें, तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9% बढ़कर ₹1,343 करोड़ हुआ। EBITDA में 14% की ग्रोथ के साथ यह ₹242 करोड़ रहा। हालांकि, इस अवधि में कंसोलिडेटेड PAT ग्रोथ थोड़ी धीमी, 2% बढ़कर ₹153 करोड़ रही।
दूसरी ओर, स्टैंडअलोन (Standalone) परफॉर्मेंस में Q3 FY26 में रेवेन्यू 6% घटकर ₹204 करोड़ रहा। लेकिन, EBITDA में 38% की वृद्धि हुई और यह ₹49 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि नेट प्रॉफिट 61% बढ़कर ₹33 करोड़ रहा। 9 महीने की स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 29% की गिरावट आई और यह ₹561 करोड़ रहा, वहीं EBITDA 18% घटकर ₹112 करोड़ रहा।
इन नतीजों के पीछे की वजह:
इस ज़बरदस्त परफॉर्मेंस की मुख्य वजह कंपनी का इंटरनेशनल (International) बिज़नेस रहा, जिसमें 81% की भारी बढ़ोतरी देखी गई। इसके अलावा, बड़े ऑर्डर्स (Orders) मिलना भी एक बड़ा फैक्टर रहा। कंपनी को राजस्थान ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट के लिए ₹320 करोड़ का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट (Contract) मिला है।
जोखिम और भविष्य की रणनीति:
कंपनी के सामने सबसे बड़ा जोखिम हाई वर्किंग कैपिटल डेज़ (Working Capital Days) का है, जो H1 FY26 में 208 दिन था। यह मुख्य रूप से जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) प्रोजेक्ट्स में फंसे पैसों के कारण है। कंपनी को उम्मीद है कि यह अगले 3 से 6 महीनों में सामान्य हो जाएगा।
WPIL अपनी ऑर्गेनिक ग्रोथ के साथ-साथ इनऑर्गेनिक ग्रोथ (Inorganic Growth) पर भी ज़ोर दे रही है। कंपनी के पास फिलहाल डोमेस्टिक (Domestic) सेगमेंट में ₹2,080 करोड़ और इंटरनेशनल बिज़नेस में ₹2,114 करोड़ का बड़ा ऑर्डर बैकलॉग (Order Backlog) है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन को 15-20% के बीच बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। कंपनी अपने ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) बिज़नेस को भी बढ़ाना चाहती है, जिससे अगले पांच सालों में प्रोजेक्ट रेवेन्यू का 25-30% हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य है।
