Voltas, भारत की लीडिंग एयर कंडीशनर (AC) कंपनी, अब इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए खुद के कंप्रेसर बनाने की तैयारी में है। इस बीच, कंपनी के चेयरमैन Noel Tata ने पद से हटने का ऐलान किया है। साथ ही, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए **₹200 करोड़** का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान भी जारी किया है। ये बड़े फैसले कंपनी के लीडरशिप और मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी में अहम बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
क्यों अहम है कंप्रेसर?
Voltas, जो रूम एयर कंडीशनर (AC) सेगमेंट में मार्केट लीडर है, अब कंप्रेसर बनाने के अपने पुराने प्लान पर फिर से विचार कर रही है। कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चेयरमैन Noel Tata ने बताया कि मैनेजमेंट इस कदम पर गौर कर रहा है। कंप्रेसर, AC का सबसे जरूरी और महंगा पार्ट होता है। फिलहाल, भारतीय AC इंडस्ट्री ज्यादातर चीन और थाईलैंड जैसे देशों से इंपोर्ट होने वाले कंप्रेसर पर निर्भर है।
इंपोर्ट पर निर्भरता घटाने की कोशिश
अगर Voltas खुद के कंप्रेसर बनाती है, तो कंपनी सप्लाई चेन पर बेहतर कंट्रोल हासिल कर सकेगी और लॉन्ग-टर्म में कॉस्ट भी कम कर सकती है। यह कदम भारत में AC कंपोनेंट्स के 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगा। हालांकि, कंप्रेसर टेक्नोलॉजी के लिए खास इंजीनियरिंग और भारी निवेश की जरूरत होती है।
रेगुलेटरी बाधाएं और पिछला अनुभव
Voltas इससे पहले भी इस फील्ड में उतरने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन रास्ता आसान नहीं रहा। अप्रैल 2023 में, कंपनी ने Highly International (Hong Kong) Ltd के साथ प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर को कैंसल कर दिया था। इसकी मुख्य वजह सरकार से जरूरी अप्रूवल न मिलना था। यह डील इसलिए अटक गई क्योंकि यह उन देशों से निवेश के लिए था जो भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करते हैं, और जिसके लिए सरकार की कड़ी जांच की जरूरत होती है। ऐसे में, भविष्य में अगर Voltas किसी फॉरेन टेक्निकल पार्टनर के साथ मिलकर कंप्रेसर बनाती है, तो उसे इसी तरह की रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
Noel Tata का इस्तीफा और Capex प्लान
इस स्ट्रेटेजिक बदलाव के साथ ही, Noel Tata ने चेयरमैन पद से हटने की घोषणा की है। उनके इस्तीफे के बाद कंपनी के लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी में कोई बदलाव आता है या नहीं, यह देखना अहम होगा।
इसके अलावा, Voltas ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए ₹200 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान भी रखा है। यह पैसा कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने और ऑटोमेशन को बेहतर बनाने में खर्च होगा। यह कदम तेजी से बढ़ते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर की डिमांड को पूरा करने और सेमी-अर्बन मार्केट्स से आ रही मांग को भुनाने की रणनीति का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आगे चलकर, निवेशकों की नजरें कंप्रेसर मैन्युफैक्चरिंग की टाइमलाइन पर टिकी रहेंगी। क्या कंपनी इसे अकेले करेगी या नए पार्टनर की तलाश करेगी, यह देखना अहम होगा। Noel Tata के बाद लीडरशिप ट्रांजिशन और ₹200 करोड़ के Capex से कंपनी के मार्जिन में सुधार की उम्मीदें भी निवेशकों के लिए अहम फैक्टर होंगी।
