इस तिमाही के निराशाजनक नतीजों के बाद Voltamp Transformers का शेयर बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 20% लुढ़क गया और ₹10,016 के निचले सर्किट पर बंद हुआ। इस गिरावट से कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) करीब ₹3,000 करोड़ घट गया।
चौथी तिमाही के निराशाजनक नतीजे
कंपनी के जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही (Q4FY25) के नेट प्रॉफिट में 50% की भारी गिरावट आई और यह ₹48 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹97 करोड़ था।
रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में 1% की मामूली गिरावट आई और यह ₹617.22 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹624.81 करोड़ था।
इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई (Ebitda) भी 30% घटकर ₹79.77 करोड़ रह गई, जिससे Ebitda मार्जिन 18.63% से गिरकर 13.17% पर आ गया।
पूरे फाइनेंशियल ईयर में मजबूती और डिविडेंड का ऐलान
तिमाही नतीजों में कमजोरी के बावजूद, Voltamp Transformers ने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) के लिए मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। नेट सेल्स और सर्विस रेवेन्यू में 11.34% का इजाफा हुआ और यह ₹2,153.68 करोड़ रहा।
शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर यह है कि कंपनी के बोर्ड ने 1000% का फाइनल डिविडेंड (यानी ₹100 प्रति शेयर) देने की सिफारिश की है, जो मंजूरी के अधीन है।
कंपनी ने FY26 की शुरुआत ₹1,200 करोड़ के ऑर्डर बैक लॉग के साथ की थी और अप्रैल 2025 में ₹310 करोड़ के नए ऑर्डर भी हासिल किए हैं, जो प्रोडक्ट्स की लगातार मांग का संकेत देता है।
निवेश एडजस्टमेंट और बाहरी दबाव
Voltamp Transformers ने तिमाही मुनाफे में गिरावट के लिए कई वजहें बताई हैं, जिनमें अकाउंटिंग एडजस्टमेंट (Accounting Adjustments) भी शामिल हैं।
कंपनी ने ऊंचे ब्याज दरों के समय लंबी अवधि की सिक्योरिटीज में भारी निवेश किया था, जिससे पहले अच्छा मार्क-टू-मार्केट (MTM) गेन हो रहा था। लेकिन, मार्च तिमाही में लंबी अवधि की गवर्नमेंट सिक्योरिटीज पर यील्ड (Yield) बढ़ने से नेगेटिव MTM गेन हुए, जिसने रिपोर्टेड प्रॉफिट को प्रभावित किया, भले ही निवेश की रणनीति लंबी अवधि के लिए है।
बाहरी दबाव भी बढ़ा। गिरते रुपये (Depreciating Rupee) ने इम्पोर्टेड रॉ-मटेरियल (Imported Raw Material) की लागत बढ़ा दी। साथ ही, वेंडर्स (Vendors) ने एक्सपोर्ट मार्केट (Export Markets) को प्राथमिकता दी, जिससे जरूरी कंपोनेंट्स की लागत तेजी से बढ़ी और इनपुट खर्चों का बोझ कंपनी पर आया। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्ष ने ट्रांसफॉर्मर ऑयल (Transformer Oil) की कीमतों में भी काफी इजाफा किया, जिससे लागत की चुनौतियां और बढ़ गईं।
