₹530 करोड़ के ऑर्डर से शेयर में तूफानी तेजी!
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को Vikran Engineering के शेयर करीब 12% बढ़कर दिन के उच्च स्तर ₹61.77 पर पहुंच गए। इस शानदार तेजी का मुख्य कारण कंपनी का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) फर्म होना और उसे MSEDCL से ₹530.80 करोड़ (GST छोड़कर) के दो 'लेटर्स ऑफ अवार्ड' (LOAs) मिलना है। ये ठेके महाराष्ट्र के नासिक और कोल्हापुर जोन में पावर डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम को मजबूत करने से जुड़े हैं। कंपनी ने बताया है कि इन प्रोजेक्ट्स को एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से फंड मिलेगा और इन्हें 21 महीनों में पूरा किया जाएगा।
मुनाफे में बड़ी गिरावट ने बढ़ाई चिंता
हालांकि इन बड़े ऑर्डर्स से कंपनी की ऑर्डर बुक ₹5,000 करोड़ से ऊपर जाने की उम्मीद है, जो कंपनी के भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत है। लेकिन यह अच्छी खबर कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों के बिल्कुल विपरीत है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में, Vikran Engineering का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 46% घटकर ₹34.9 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट (PAT) में भी 38% की गिरावट आई, जो ₹20.9 करोड़ पर आ गया। यह दिखाता है कि नए प्रोजेक्ट्स से रेवेन्यू की उम्मीदें बढ़ने के बावजूद कंपनी को मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
बाजार का रुख और कंपनी का वैल्यूएशन
Vikran Engineering भारत के बढ़ते पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) EPC सेक्टर में एक स्मॉल-कैप कंपनी है। यह बाजार 2024 में USD 27.8 बिलियन से बढ़कर 2030 तक USD 37.6 बिलियन होने का अनुमान है। सरकार द्वारा ग्रिड आधुनिकीकरण, रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन और बिजली की बढ़ती मांग इस सेक्टर को और बढ़ावा दे रही है। ऐतिहासिक रूप से, Vikran Engineering अपनी एफिशिएंसी और मजबूत मार्जिन के लिए जानी जाती थी, जो इसे Kalpataru Power Transmission और KEC International जैसे अपने साथियों से अलग करती थी। लेकिन Q3 FY26 के नतीजों के अनुसार, EBITDA मार्जिन 13.1% और PAT मार्जिन 7.8% रहा, जो उसके पिछले प्रदर्शन से काफी कम है। 18-21 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहे ये शेयर, इंडस्ट्री के औसत से डिस्काउंट पर हैं, और पिछले एक साल में 37% से अधिक गिर चुके हैं। ऐसे में, बाजार इन चुनौतियों को पहले ही भांप रहा है।
प्रॉफिटेबिलिटी पर सवालिया निशान
Q3 FY26 में EBITDA में आई 46% की गिरावट कंपनी की मार्जिन सस्टेनेबिलिटी पर सवाल खड़े करती है। भले ही कंपनी अपनी तकनीकी क्षमता और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की बात करे, लेकिन नतीजों में यह गिरावट लागत नियंत्रण, सही प्रोजेक्ट चुनने या शुरुआती खर्चों में दिक्कतों की ओर इशारा करती है। एनालिस्ट्स की 'Sell' रेटिंग भी इन्हीं चिंताओं को दर्शाती है, और कुछ अनुमानों के अनुसार मौजूदा प्राइस टारगेट से ज्यादा तेजी की उम्मीद कम है। कंपनी के CEO राकेश मार्कडकर की 40% हिस्सेदारी (Insider Ownership) विश्वास तो जगाती है, पर प्रदर्शन खराब होने पर जवाबदेही का सवाल भी उठता है।
मैनेजमेंट का भरोसा और भविष्य की योजना
इन वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, Vikran Engineering का मैनेजमेंट आशावादी बना हुआ है। चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश मार्कडकर ने सोलर EPC सेक्टर में कंपनी की बढ़ती मौजूदगी पर जोर दिया है और उम्मीद जताई है कि सोलर प्रोजेक्ट्स के आगे बढ़ने से कंपनी को ऑपरेटिंग लिवरेज के फायदे मिलेंगे। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 तक ₹2,000 करोड़ के रेवेन्यू लक्ष्य की पुष्टि की है। यह लक्ष्य नए फाइनेंशियल ईयर में ₹5,000 करोड़ से अधिक की अनुमानित ऑर्डर बुक से समर्थित है, जिसमें सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स का बड़ा योगदान होगा। MSEDCL के नए कॉन्ट्रैक्ट्स को ADB से फंड मिलना कंपनी की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट क्षमताओं को एक बार फिर मान्य करता है।