Vikram Solar ने Evervolt Solar Technology के साथ एक बड़ा एग्रीमेंट साइन किया है। इसके तहत कंपनी जुलाई 2026 से मार्च 2027 के बीच 130 MW सोलर सेल की सप्लाई लेगी। इस कदम से डोमेस्टिक मॉड्यूल प्रोडक्शन को बूस्ट मिलेगा और प्रॉफिट मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
सोलर बिजनेस को मिलेगी मजबूती
Vikram Solar लिमिटेड ने Evervolt Solar Technology India के साथ एक कमर्शियल एग्रीमेंट किया है, जिसके तहत कंपनी 130 MW की मोनो-PERC 10BB सोलर सेल की सप्लाई लेगी। यह सप्लाई जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक चलेगी। खास बात यह है कि ये सोलर सेल डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) नॉर्म्स के तहत हैं, जो भारत में सरकारी सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी हैं, जहां स्थानीय स्तर पर बने कंपोनेंट्स का इस्तेमाल अनिवार्य होता है।
यह एक सामान्य सप्लाई एग्रीमेंट है और इसमें किसी भी तरह की इक्विटी हिस्सेदारी या बोर्ड में भागीदारी शामिल नहीं है। Vikram Solar ने साफ किया है कि Evervolt Solar Technology, जिसका पुराना नाम CETC Renewable Energy Technology India था, कोई रिलेटेड पार्टी नहीं है, यानी यह एक प्योर कमर्शियल डील है।
प्रॉफिट मार्जिन पर फोकस
सेक्टर में बढ़ी हुई मुश्किलों और ग्लोबल ओवरसप्लाई के बीच, कंपनी अपने मुनाफे को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है। सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री हाल के दिनों में सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव से जूझ रही है। Vikram Solar के CFO, रंजन कुमार जिंदल ने कहा कि इस डील का मकसद कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को ठीक करना है। मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए एक मजबूत आउटलुक दिया है, जिसके मुताबिक ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) फाइनेंशियल ईयर 26 के मुकाबले 1.7 गुना तक पहुंच सकता है।
हालांकि, मैनेजमेंट के भरोसे के बावजूद, इन मार्जिन का असल में कितना फायदा होगा, यह डिमांड में स्थिरता और रॉ मटेरियल की कीमतों के मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा। इस खबर के बाद BSE पर Vikram Solar के शेयर 5.22% चढ़कर ₹193.40 पर बंद हुए।
बड़ी विस्तार योजना और फंडिंग
इस सप्लाई डील के अलावा, कंपनी एक बड़ी कैपिटल एक्सपेंडिचर योजना पर भी काम कर रही है। Vikram Solar के पास ₹2,700 करोड़ के निवेश वाली 6-गीगावाट की बैकवर्ड इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट के लिए बोर्ड की मंजूरी है। इस ग्रोथ स्ट्रेटेजी के तहत, कंपनी अगले क्वार्टर में तमिलनाडु में एक वेफर और इनगॉट फैसिलिटी पर काम शुरू करने वाली है।
इन विस्तार प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग इंटरनल कैश फ्लो और डेट के मिक्स से आएगी। शेयरहोल्डर्स के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनी इन बड़े प्रोजेक्ट्स को बैलेंस शीट पर ज्यादा बोझ डाले बिना कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करती है। तमिलनाडु साइट पर कंस्ट्रक्शन की स्पीड और नई कैपेसिटी के लिए ऑर्डर हासिल करने की कंपनी की क्षमता आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगी।
