Vikram Solar के शेयर 52-Week Low के करीब, तमिलनाडु में नई फैक्ट्री शुरू

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Vikram Solar के शेयर 52-Week Low के करीब, तमिलनाडु में नई फैक्ट्री शुरू

Vikram Solar ने तमिलनाडु में **600,000 वर्ग फुट** की नई सोलर मॉड्यूल फैसिलिटी शुरू की है, जिसका मकसद डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना है। इस विस्तार के बावजूद, स्टॉक पर दबाव बना हुआ है और यह अपने **52-Week Low** के करीब ट्रेड कर रहा है।

नई सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू

Vikram Solar ने तमिलनाडु के Gangaikondan में अपनी नई सोलर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को चालू कर दिया है। यह 600,000 वर्ग फुट की यूनिट ऑटोमेशन और डिजिटल इंटीग्रेशन के साथ बनाई गई है। यहां सोलर मॉड्यूल की ऑटोमेटेड सॉर्टिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की जाएगी। शुरुआत में, यह प्लांट कंपनी के Hypersol N-Type TOPCon G12R मॉड्यूल बनाएगा, जिनकी पावर रेटिंग 640 Wp तक है।

क्षमता विस्तार की बड़ी योजनाएं

कंपनी ने मल्टी-ईयर कैपेसिटी विस्तार की एक बड़ी योजना बनाई है। इस प्लांट के बाद, Vikram Solar का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2027 के अंत तक 9 GW सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी हासिल करना है, और फाइनेंशियल ईयर 2028 तक इसमें 3 GW और जोड़ने की योजना है। कंपनी FY29-30 तक 12 GW वेफर और इंगट मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी स्थापित करने का इरादा रखती है। चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Gyanesh Chaudhary के मुताबिक, यह विस्तार बढ़ती मांग और सरकार की डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देने वाली पहलों के अनुरूप है।

शेयर पर दबाव का कारण

जहां कंपनी विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रही है, वहीं बाजार की चाल थोड़ी धीमी है। इस खबर के बाद Vikram Solar के शेयर 2% से ज्यादा गिरे हैं और यह अपने 52-Week Low के करीब कारोबार कर रहे हैं। पिछले 6 महीनों में स्टॉक 23% से ज्यादा और इस साल अब तक लगभग 22% गिर चुका है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इन बड़ी कैपेसिटी टारगेट्स को कैसे पूरा करती है, खासकर इतने बड़े कैपिटल खर्च के वित्तीय प्रबंधन के साथ। बड़े प्रोजेक्ट्स में अक्सर लागत बढ़ने, देरी और नई प्रोडक्शन कैपेसिटी के लिए लगातार बाजार की मांग सुनिश्चित करने जैसे जोखिम होते हैं। इसके अलावा, भारत का सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर काफी प्रतिस्पर्धी है। निवेशक कंपनी के अगले तिमाही नतीजों पर नजर रखेंगे ताकि विस्तार योजनाओं का कर्ज और प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चल सके।

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