विश्लेषकों को उम्मीद है कि Vedanta का EBITDA इस तिमाही में सालाना आधार पर 50-60% तक बढ़ सकता है। इसका मुख्य कारण एल्युमीनियम, जिंक और सिल्वर जैसी प्रमुख कमोडिटीज़ (Commodities) से बेहतर रियलाइजेशन (Realisation) और एल्युमिना जैसी इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में नरमी है। Nuvama की माने तो, जिंक और एल्युमीनियम सेगमेंट के मजबूत योगदान से EBITDA में 55% का उछाल देखा जा सकता है।
कंपनी के पावर डिवीजन में भी मीनाक्षी (Meenaxi) और एथेना (Athena) फैसिलिटीज़ से वॉल्यूम में बढ़ोतरी से EBITDA में सुधार की उम्मीद है। वहीं, स्टील सेगमेंट में बेहतर प्राइसिंग एनवायरनमेंट (Pricing Environment) के चलते EBITDA पॉजिटिव होने का अनुमान है। ऑयल एंड गैस (Oil & Gas) सेगमेंट से भी तिमाही-दर-तिमाही मामूली ग्रोथ की उम्मीद है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा लक्ष्य है, क्योंकि Vedanta वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) तक $6 बिलियन से अधिक के सालाना EBITDA काAim कर रही है, जो कि एक रिकॉर्ड हाई होगा।
प्रमुख सेगमेंट और लागत का गणित
Vedanta का एल्युमीनियम सेगमेंट ग्रोथ का एक अहम हिस्सा है, जो ऊंचे एवरेज प्राइस (Average Price) से लाभान्वित हो रहा है। हालांकि, बढ़ती पावर कॉस्ट (Power Cost) थोड़ी रुकावट बन सकती है। कंपनी का लक्ष्य FY28 तक एल्युमीनियम प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) को ग्लोबल टॉप में रखना है। दूसरी ओर, हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) के ज़रिए कंपनी का जिंक ऑपरेशन भारतीय बाज़ार में हावी है, जिसकी डोमेस्टिक मार्केट में 75% से अधिक हिस्सेदारी है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर (Integrated Zinc Producer) है।
वैश्विक स्तर पर, मेटल्स और माइनिंग सेक्टर (Metals and Mining Sector) में रिकवरी दिख रही है, जो भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्बनाइजेशन (Urbanisation) प्रोजेक्ट्स की मजबूत मांग से प्रेरित है। मगर, मध्य पूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) ग्लोबल सप्लाई चेन (Supply Chain) को बाधित कर रही हैं, जिससे एल्युमीनियम सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ रहा है। ऊंचे फ्रेट कॉस्ट (Freight Cost) और सप्लाई चेन की दिक्कतें आयरन ओर की कीमतों को भी बढ़ा रही हैं। Vedanta का P/E रेश्यो (लगभग 16.2x से 24.0x) कुछ घरेलू साथियों जैसे NMDC (10.4x) और NALCO (12.6x) के बराबर या थोड़ा ऊपर है, लेकिन सेक्टर के औसत 26.41x से कम है। कंपनी ने FY25 में 36% का इंडस्ट्री-लीडिंग EBITDA मार्जिन दर्ज किया था।
संभावित जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं। इनपुट कॉस्ट, खासकर पावर और एलुमिना के बढ़ने से एल्युमीनियम सेगमेंट में मार्जिन कम हो सकता है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं कमोडिटी की कीमतों और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी (Operational Stability) के लिए लगातार जोखिम पैदा कर रही हैं। Vedanta का 2.49 का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) एक चिंता का विषय बन सकता है, हालांकि FY25 में इसका नेट डेट टू EBITDA रेश्यो सुधरकर 2.0x हो गया था। Glencore और BHP जैसे बड़े ग्लोबल प्लेयर्स के मुकाबले Vedanta को ऑपरेशनल एक्सीलेंस (Operational Excellence) बनाए रखना होगा, खासकर कॉस्ट कंट्रोल (Cost Control) के मामले में।
विश्लेषकों की राय और भविष्य की योजनाएं
विश्लेषकों का नज़रिया पॉजिटिव बना हुआ है, और Vedanta के लिए 'Strong Buy' रेटिंग दी गई है। औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट (Price Target) लगभग ₹857.85 है, जो मौजूदा स्तरों से बढ़त का संकेत देता है। कंपनी ने FY26 के लिए $6 बिलियन से अधिक के रिकॉर्ड EBITDA का लक्ष्य रखा है। पांच एंटिटीज़ (Entities) को डीमर्ज (Demerge) करने की स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव्स (Strategic Initiatives) की योजना से FY26 के अंत तक वैल्यू अनलॉक होने की उम्मीद है।