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Vedanta Share Price: मेटल्स में रिकॉर्ड उत्पादन, पर ऑयल-गैस में गिरी Vedanta की चाल!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Vedanta Share Price: मेटल्स में रिकॉर्ड उत्पादन, पर ऑयल-गैस में गिरी Vedanta की चाल!
Overview

Vedanta Ltd. के लिए **फाइनेंशियल ईयर 2026** के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी ने अपने एल्युमिनियम और हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) बिज़नेस में रिकॉर्ड उत्पादन के साथ शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन दूसरी ओर, इसके ऑयल एंड गैस प्रोडक्शन में **16%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

मेटल्स में वेदांता की धमाकेदार एंट्री

Vedanta Ltd. ने FY26 में अपने मेटल्स और माइनिंग सेगमेंट में बेहतरीन ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दिखाई है। कंपनी ने एल्युमिनियम बिज़नेस में 24.56 लाख टन का ऑल-टाइम हाई प्रोडक्शन हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह ग्रोथ खासकर लंजिगढ़ रिफाइनरी में प्रोडक्शन बढ़ने और एफिशिएंसी (efficiency) में सुधार के कारण संभव हुआ है। कंपनी की एल्युमिना प्रोडक्शन भी 48% बढ़कर 29.16 लाख टन रही।

हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) का माइंड मेटल प्रोडक्शन भी 2% बढ़कर 11.14 लाख टन पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण बेहतर ओर ग्रेड (ore grade) रहा। इसके अलावा, पिग आयरन प्रोडक्शन 10%, कॉपर कैथोड आउटपुट 15% और फेरो क्रोम प्रोडक्शन 21% बढ़ा है। पावर सेल्स में भी 14% का इजाफा देखा गया।

ऑयल एंड गैस में आई गिरावट

जहां एक ओर मेटल्स में वेदांता का डंका बज रहा है, वहीं कंपनी के ऑयल एंड गैस सेगमेंट से अच्छी खबर नहीं आई है। इस सेगमेंट का प्रोडक्शन पिछले साल के मुकाबले 16% गिरकर 87.2 kboepd पर आ गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से पुराने फील्ड्स के नेचुरल डिप्लीशन (natural depletion) यानी प्राकृतिक रूप से उत्पादन कम होने के कारण हुई है।

वैल्यूएशन्स और सेक्टर का भविष्य

Vedanta का मार्केट कैप लगभग ₹2.69 ट्रिलियन है और इसका पी/ई रेश्यो (P/E ratio) 14.8x से 24.5x के बीच है। ब्रोकरेज फर्म्स (brokerage firms) आम तौर पर वेदांता को 'Buy' या 'Moderate Buy' रेटिंग दे रहे हैं, और उनके अनुसार शेयर में 8.6% से 17.6% तक की तेजी देखने को मिल सकती है।

ग्लोबल मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में एनर्जी ट्रांजिशन (energy transition) और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से ग्रोथ की उम्मीद है। एल्युमिनियम की कीमतों में हालिया उछाल वेदांता जैसी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

कंपनी के लिए चुनौतियां

हालांकि, ऑयल एंड गैस प्रोडक्शन में लगातार गिरावट कंपनी के ओवरऑल मुनाफे पर दबाव डाल रही है। साथ ही, इन्फ्लेशन (inflation) और घटते ओर ग्रेड के कारण ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस (operating expenses) बढ़ने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट के माइनिंग के लिए कंसेशनल डीजल रेट्स (concessional diesel rates) न देने के फैसले से भी लागत बढ़ सकती है। डी-मर्जर प्लान्स (demerger plans) को लेकर चल रही कानूनीThe New York Times चर्चाएं भी कंपनी के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर हैं।

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