Vedanta के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अगले दो साल में **$20 बिलियन** के मुनाफे का भारी-भरकम टारगेट सेट किया है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग और इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन पर जोर देगी, जिसमें वेस्ट बंगाल में डिस्प्ले ग्लास जैसे हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग शामिल है।
मुनाफे का बड़ा रोडमैप
कोलकाता में एक इंडस्ट्री इवेंट के दौरान, Vedanta Limited के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कंपनी के लिए एक महत्वाकांक्षी विजन पेश किया है। कंपनी का फोकस अब केवल कमोडिटी (Commodity) सप्लायर बने रहने के बजाय वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ने का है। Vedanta का लक्ष्य अगले 2 साल के भीतर $20 बिलियन का मुनाफा कमाना है।
वेस्ट बंगाल में नया दांव
इस ग्रोथ स्ट्रैटेजी के तहत कंपनी वेस्ट बंगाल में अपना विस्तार करने की तैयारी कर रही है। फोकस उन हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स पर है जो फिलहाल भारत में बाहर से मंगाए जाते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस और ऑटोमोटिव डिस्प्ले के लिए जरूरी 'स्पेशलाइज्ड ग्लास' का उत्पादन शामिल है। इससे ग्लोबल मार्केट की वोलेटिलिटी (Volatility) से होने वाले असर को कम करने में मदद मिलेगी।
इनवेस्टर्स के लिए क्या है जरूरी?
यह एक्सपेंशन प्लान सुनने में काफी बड़ा है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। कंपनी को एल्युमीनियम, जिंक और ऑयल जैसे साइक्लिकल सेक्टर्स में भारी कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) करनी होगी। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा मॉनिटरेबल (Monitorable) पॉइंट कंपनी का डेट मैनेजमेंट और बैलेंस शीट रहेगी।
कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के लिए आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल कर रही है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी इन प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से जमीन पर उतारती है और ग्लोबल कमोडिटी प्राइस के उतार-चढ़ाव के बीच मार्जिन्स (Margins) को कैसे बरकरार रखती है।
