Vedanta Stock: डी-मर्जर के बाद निवेशकों को झटका? शेयर **3.5%** गिरा, जानिए क्या है वजह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Vedanta Stock: डी-मर्जर के बाद निवेशकों को झटका? शेयर **3.5%** गिरा, जानिए क्या है वजह
Overview

Vedanta के शेयरों में आज यानी 30 अप्रैल 2026 को डी-मर्जर के बाद ट्रेडिंग शुरू होने के साथ ही तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार में लाखों शेयरों का कारोबार हुआ, क्योंकि कंपनी के विभाजन पर निवेशकों की प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह गिरावट तब आई है, जब कंपनी ने कमोडिटी कीमतों और बेहतर परिचालन के दम पर Q4 में दमदार नतीजे पेश किए थे।

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डी-मर्जर के बाद बाजार की प्रतिक्रिया: Vedanta के शेयर क्यों गिरे?

Vedanta के शेयर 30 अप्रैल 2026 को डी-मर्जर के बाद ट्रेडिंग शुरू होने वाले दिन ही गिरे। यह गिरावट निवेशकों के मन में चल रही उलझन को दर्शाती है कि कंपनी की अलग-अलग इकाइयों का सही वैल्यूएशन (Valuation) कैसे किया जाए। पिछले कारोबारी दिन के ₹773.60 के मुकाबले, शेयर 3.5% लुढ़ककर ₹271.50 पर आ गए, जो विश्लेषकों के ₹300-325 के लक्षित दायरे से भी कम है। इस दिन 30 मिलियन से ज्यादा शेयरों की ट्रेडिंग हुई, जो बाजार की सक्रियता को दिखाता है।

Q4 में दमदार नतीजे, कमोडिटी कीमतों का सहारा

शेयरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, Vedanta के फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों ने उम्मीदों को पूरा किया। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में साल-दर-साल 89% की भारी बढ़ोतरी हुई और यह ₹9,352 करोड़ पर पहुंच गया। रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की तुलना में 29% बढ़कर रिकॉर्ड ₹51,524 करोड़ रहा। ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई (EBITDA) में साल-दर-साल 59% का इजाफा हुआ और यह ₹18,447 करोड़ रहा। कमोडिटी की ऊंची कीमतों ने इस मजबूत प्रदर्शन को बढ़ावा दिया। एल्यूमीनियम की कीमतें तिमाही-दर-तिमाही 13% बढ़कर $3,198 प्रति टन हो गईं, और जिंक इंडिया सेगमेंट में चांदी की कीमतों में 54% का इजाफा हुआ, जो लगभग $84 प्रति औंस पर पहुंच गईं। विश्लेषकों का अनुमान है कि सप्लाई की समस्या के कारण 2026 में एल्यूमीनियम की कीमतें $3,000 प्रति टन के आसपास मजबूत बनी रहेंगी। जिंक की कीमतें भी 2026 में लगभग $2,950 प्रति टन पर बनी रहने की उम्मीद है, भले ही कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका हो।

डी-मर्जर से बनीं पांच नई कंपनियाँ

30 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए डी-मर्जर ने Vedanta को पांच अलग-अलग कंपनियों में बांट दिया है: Vedanta Aluminium, Vedanta Oil & Gas, Vedanta Power, Vedanta Iron & Steel, और शेष Vedanta Ltd. यह अवशिष्ट (Residual) कंपनी जिंक इंडिया (Hindustan Zinc), जिंक इंटरनेशनल और कॉपर जैसे प्रमुख ऑपरेशंस को अपने पास रखेगी। इस पुनर्गठन (Restructuring) का लक्ष्य कंपनी की संरचना को सरल बनाना, अलग-अलग वैल्यू बनाना और लक्षित निवेश आकर्षित करना है, जिससे प्रत्येक व्यवसाय अपने विकास पथ पर आगे बढ़ सके। शेयरधारकों को अपने हर Vedanta शेयर के बदले प्रत्येक नई इकाई में एक शेयर मिलेगा। नई कंपनियों के जून 2026 के मध्य तक ट्रेडिंग शुरू करने की उम्मीद है। हिंदुस्तान जिंक, जो अवशिष्ट इकाई के मूल्य में एक प्रमुख योगदानकर्ता है, की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹2.59 लाख करोड़ है और पिछले बारह महीनों में इसका P/E रेश्यो 18.7 से 20.5 के बीच रहा है।

कर्ज का बोझ और एग्जीक्यूशन रिस्क बनी हुई है चिंता

हालांकि Q4 के नतीजे मजबूत थे और विश्लेषक कमोडिटी कीमतों को लेकर आशावादी हैं, Vedanta की वित्तीय संरचना में जोखिम (Risks) बने हुए हैं। कंपनी पर महत्वपूर्ण कर्ज है, जिसमें हाल ही में 1.9 से 2.39x का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) रहा है। परिचालन से होने वाला कैश फ्लो ब्याज भुगतान को कवर कर सकता है, लेकिन यह उच्च ऋण (High Debt) वित्तीय लचीलेपन (Financial Flexibility) को सीमित करता है और रीफाइनेंसिंग (Refinancing) की चुनौतियां पैदा करता है, खासकर कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान। पांच अलग-अलग इकाइयों को अलग करना और सूचीबद्ध करना भी जटिलता बढ़ाता है। निवेशक देखेंगे कि प्रत्येक नई कंपनी अपनी पूंजी, संचालन और ऋण का प्रबंधन कैसे करती है। उदाहरण के लिए, Motilal Oswal ने 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग बरकरार रखी है, जिसमें ₹800 प्रति शेयर का सम-ऑफ-द-पार्ट्स मूल्यांकन (Sum-of-the-parts valuation) देखा गया है, लेकिन बाजार की स्थितियों या एग्जीक्यूशन रिस्क के कारण मामूली संभावित अपसाइड (Upside) है।

एग्जीक्यूशन पर टिका है पॉजिटिव आउटलुक

विश्लेषक आम तौर पर सकारात्मक से तटस्थ (Neutral) दृष्टिकोण रखते हैं। Vedanta के लिए आम सहमति रेटिंग (Consensus Rating) 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) है, जिसका औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹859.77 है, जो 11% से अधिक की संभावित अपसाइड का सुझाव देता है। हालांकि, Motilal Oswal ₹800 के लक्ष्य के साथ 'न्यूट्रल' रेटिंग बनाए रखता है, जिसमें कहा गया है कि Q4 के नतीजे उम्मीदों के अनुरूप रहे और डी-लीवरेजिंग (Deleveraging) पटरी पर है। डी-मर्ज की गई इकाइयों की जून 2026 के मध्य तक लिस्टिंग प्रत्येक सेगमेंट के लिए स्पष्ट मूल्यांकन स्थापित करने में महत्वपूर्ण होगी। जबकि मजबूत एल्यूमीनियम और जिंक की कीमतें, साथ ही परिचालन लाभ, समर्थन प्रदान करते हैं, कंपनी के पर्याप्त ऋण (Substantial Debt) का प्रबंधन करना और एक सुचारू डी-मर्जर एग्जीक्यूशन सुनिश्चित करना भविष्य के रिटर्न के लिए महत्वपूर्ण है।

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