Vedanta का 'वैल्यू अनलॉकिंग' प्लान: 5 कंपनियों में बंटेंगे बिजनेस
Vedanta Limited ने अपने शेयरधारकों के लिए 'वैल्यू अनलॉकिंग' (Value Unlocking) के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कंपनी अपने मुख्य व्यवसायिक इकाइयों को पांच स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित करेगी, जिनकी लिस्टिंग 2026 के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है। चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इसे 'एक रोमांचक नया अध्याय' बताते हुए कहा कि प्रत्येक खंड को अपनी विकास योजना और पूंजी रणनीति मिलेगी। यह कदम ऐसे समय आया है जब Vedanta के शेयर पिछले एक साल में लगभग 80% उछले हैं और रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच गए हैं।
विस्तार की आक्रामक योजनाएं
यह विभाजन बड़ी विस्तार योजनाओं से जुड़ा है। एल्यूमीनियम उत्पादन को दोगुना कर 60 लाख टन सालाना करने का लक्ष्य है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर लागत दक्षता में शीर्ष पर रहना है। ऑयल एंड गैस डिवीजन 5 अरब डॉलर का निवेश कर उत्पादन को 3 लाख से 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना बना रहा है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। Vedanta पावर अपनी क्षमता को 4.2 गीगावाट से बढ़ाकर 12 गीगावाट करने का लक्ष्य रखती है, जिसमें भविष्य में हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा की भी योजनाएं हैं। लौह और इस्पात का कारोबार अपनी क्षमता को 40 लाख टन से बढ़ाकर 150 लाख टन प्रति वर्ष करने की उम्मीद कर रहा है, जिसके लिए कंपनी के पास स्वयं की खदानें और गैस आपूर्ति है।
कंपनी के पास क्या रहेगा?
मुख्य Vedanta कंपनी प्रमुख व्यवसायों में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बनाए रखेगी। इसमें हिंदुस्तान जिंक (HZL) में लगभग 60% हिस्सेदारी शामिल है, जो भारत का सबसे बड़ा जिंक, लेड और सिल्वर उत्पादक है। Vedanta Zinc International (VZI) के साथ दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया की संपत्तियां भी कंपनी के पास रहेंगी। इसके अलावा, तांबा व्यवसाय (जिसमें भारतीय बाजार की 35% हिस्सेदारी है), फेरो एलॉयज डिवीजन भी मुख्य कंपनी का हिस्सा होंगे। Vedanta निकल मेटल और कोबाल्ट सल्फेट का भारत का एकमात्र उत्पादक भी है, जो EV बैटरियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कर्ज का बंटवारा और वैल्यूएशन की चिंताएं
हालांकि बाजार ने डीमर्जर (Demerger) का स्वागत किया है, लेकिन महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दे बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि Vedanta का लगभग 60,600 करोड़ रुपये का नेट कर्ज कैसे विभाजित होगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कर्ज का असमान वितरण शेयर की कीमतों को बढ़ने से रोक सकता है और अल्पावधि में गिरावट ला सकता है। कुछ का अनुमान है कि कर्ज के बंटवारे के आधार पर कीमतें ₹300-325 तक गिर सकती हैं। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो हाल के वर्षों में काफी अस्थिर रहा है, जो दर्शाता है कि इसके वित्त कितने संवेदनशील हैं।
एग्जीक्यूशन रिस्क और बाजार की अस्थिरता
विभिन्न व्यावसायिक इकाइयों में एक साथ इतने बड़े विस्तार परियोजनाओं की व्यापक श्रृंखला और एक साथ अमल में लाना महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) पैदा करता है। Vedanta एल्यूमीनियम को अपने लागत लक्ष्यों के बावजूद कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। ऑयल एंड गैस डिवीजन भी स्थापित ऊर्जा उत्पादकों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। Vedanta के शेयर का प्रदर्शन पिछले पुनर्गठन के दौरान मिश्रित रहा है, जो दर्शाता है कि बाजार की भावना कैसे बदल सकती है। इसके अलावा, कंपनी का मुनाफा एल्यूमीनियम, तेल, जिंक और स्टील की कमोडिटी कीमतों पर निर्भर करता है, यदि कीमतें गिरती हैं तो लाभ कम हो सकता है। कंपनी को पहले भी ज्वलंत मुद्दों का सामना करना पड़ा है, जैसे कि पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण इसके तूतीकोरिन कॉपर स्मेल्टर का अस्थायी बंद होना।
विश्लेषकों की राय जोखिमों के बावजूद सकारात्मक
इन जोखिमों के बावजूद, अधिकांश विश्लेषक सतर्क रूप से आशावादी बने हुए हैं। अधिकांश विश्लेषक Vedanta को 'खरीदें' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं और औसत 12 महीने के टारगेट प्राइस ₹820-860 के आसपास तय कर रहे हैं। इस विभाजन को वैल्यू को अनलॉक करने का एक तरीका माना जा रहा है, खासकर Vedanta एल्यूमीनियम के लिए, जिसे वर्तमान तंग आपूर्ति और बढ़ती कीमतों का लाभ मिलेगा। इस बड़े पुनर्गठन की सफलता Vedanta के कर्ज प्रबंधन, विस्तार परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और वैश्विक कमोडिटी बाजारों की उतार-चढ़ावों को सफलतापूर्वक संभालने पर निर्भर करेगी।
