डी-मर्जर के बाद Vedanta के शेयर में आई तूफानी तेजी
Vedanta के शेयर सोमवार, 4 मई 2026 को लगभग ₹288.75 के स्तर पर बंद हुए, जो पिछले ट्रेडिंग डे यानी 30 अप्रैल 2026 को आई भारी टेक्निकल गिरावट के बाद एक बड़ी रिकवरी है। डी-मर्जर के बाद शेयर 60% से ज़्यादा नीचे खुले थे, क्योंकि कंपनी का वैल्यू अब पांच नई लिस्टेड एंटिटीज़ में बंट गया था। उस दिन शेयर लगभग ₹277.3 के स्तर पर बंद हुए थे। यह गिरावट बिज़नेस के कोलैप्स का संकेत न होकर, एक 'एक्स-डी-मर्जर' एडजस्टमेंट था। सोमवार को हुई 3.3 करोड़ से ज़्यादा शेयर्स की ट्रेडिंग वॉल्यूम और हाई डिलीवरी परसेंटेज ने नए प्राइस लेवल पर निवेशकों की दिलचस्पी को दिखाया।
'प्योर-प्ले' स्ट्रैटेजी: वैल्यू अनलॉक या सिर्फ बिखराव?
Vedanta ने अपने बिज़नेस को पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटा है: Vedanta Aluminium, Vedanta Oil & Gas, Vedanta Power, Vedanta Iron & Steel, और एक होल्डिंग कंपनी। इसका मकसद हर बिज़नेस को अलग वैल्यू देने और 'कॉन्ग्लॉमेरेट डिस्काउंट' को खत्म कर शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करना है। समर्थकों का मानना है कि इन 'प्योर-प्ले' कंपनियों में फोकस्ड मैनेजमेंट और बेहतर कैपिटल एलोकेशन से परफॉरमेंस और वैल्यूएशन दोनों में सुधार होगा। Emkay Global ने भी कहा है कि इस कदम से री-रेटिंग हो सकती है, जिसमें एल्युमीनियम और जिंक मुख्य प्रॉफिट ड्राइवर्स बने रहेंगे।
कर्ज़ (Debt), ऑपरेशनल रिस्क और बाज़ार का ओवर-ऑप्टिमिज़म
इस तेज़ी के बावजूद, डी-मर्ज्ड स्ट्रक्चर के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि Vedanta का भारी ग्रुप डेट, जो लगभग ₹80,000 करोड़ से ज़्यादा है, इन पांच नई कंपनियों में कैसे बांटा जाएगा। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर यह बंटवारा ठीक से नहीं हुआ, तो वैल्यूएशन गेन सीमित हो सकते हैं और कुछ बिज़नेस कैश फ्लो की किल्लत से जूझ सकते हैं। माना जा रहा है कि एल्युमीनियम बिज़नेस पर डेट का बड़ा हिस्सा आ सकता है। Vedanta Resources, जो पेरेंट कंपनी है, पर 31 मार्च 2025 तक $13.8 बिलियन का डेट था। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए इसका कंसोलिडेटेड नेट डेट/EBITDA रेश्यो 0.95x था, जो एक सुधार है, मगर डेट अभी भी काफी ज़्यादा है। यह NMDC जैसी कंपनियों से अलग है, जिनका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो काफी कम है। भारत में पहले हुए डी-मर्जर के नतीजे मिले-जुले रहे हैं, यह दिखाते हुए कि बिज़नेस को अलग करने से हमेशा फाइनेंशियल परफॉरमेंस सुधरती नहीं है। पांच अलग-अलग और वोलेटाइल कमोडिटी बाज़ार का सामना करने वाले बिज़नेस को मैनेज करने में बड़ा ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन रिस्क है।
सेक्टोरल टेलविंड्स और कम्पेटिटिव वैल्यूएशन
2026 में भारतीय मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद है, जो मज़बूत डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी सपोर्ट और पॉजिटिव ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक से प्रेरित है। यूनियन बजट 2026-27 में पब्लिक कैपिटल स्पेंडिंग में बढ़ोतरी और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने के उपायों से मेटल डिमांड बढ़ेगी। Vedanta का करंट P/E रेश्यो लगभग 24.0x है, जबकि अन्य अनुमान 6.70x से 30.0x तक जाते हैं। यह वैल्यूएशन Tata Steel के P/E (लगभग 29.94x) और Hindalco Industries के P/E (लगभग 14.34x) की तुलना में कम्पेटिटिव लगता है। Hindalco का शेयर इंडस्ट्री के औसत P/E 13.28x के करीब ट्रेड कर रहा है, जो बताता है कि Vedanta का वैल्यूएशन, उसके स्पेसिफिक बिज़नेस सेगमेंट के भविष्य के आधार पर, वैल्यू दे सकता है।
एनालिस्ट्स की राय: बंटा हुआ नज़रिया
एनालिस्ट्स आमतौर पर पॉजिटिव हैं, और ज़्यादातर Vedanta को 'Buy' की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, प्राइस टारगेट में बड़ा अंतर है, जो INR 480-550 (न्यूट्रल रेटिंग) से लेकर ज़्यादा औसत ₹820.50 और ₹859.77 तक है। यह बड़ा गैप डी-मर्जर और डेट मैनेजमेंट के लॉन्ग-टर्म इम्पैक्ट को लेकर अनिश्चितता दर्शाता है। जहाँ कुछ एनालिस्ट्स वैल्यू अनलॉक से बड़े अपसाइड की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरे डेट डिस्ट्रीब्यूशन इश्यूज़ के कारण शॉर्ट-टर्म प्राइस ड्रॉप की चेतावनी दे रहे हैं।
