Vedanta Group ने अगले तीन सालों में ओडिशा में अपनी एल्युमिनियम और माइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए **₹1 लाख करोड़** के निवेश का ऐलान किया है। इस मेगा प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर रोजगार की उम्मीद है, लेकिन बाजार की नजरें कंपनी के फंड जुटाने के तरीके और कर्ज प्रबंधन पर टिकी रहेंगी।
Vedanta Group के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने राज्य सरकार के साथ चर्चा के बाद इस निवेश योजना की पुष्टि की है। इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल नई रिफाइनरी और स्मेल्टर बनाने के साथ ही झारसुगुड़ा प्लांट की क्षमता को 2 मिलियन टन सालाना बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
एल्युमिनियम हब बनाने की तैयारी
इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य झारसुगुड़ा को एल्युमिनियम उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाना है। कंपनी ऑटोमोटिव, एविएशन और रेलवे जैसे उद्योगों को कच्चा माल और सस्ती बिजली मुहैया कराने के साथ-साथ 50,000 नए रोजगार पैदा करने का दावा कर रही है। औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ कंपनी डिजिटल यूनिवर्सिटी और कैंसर अस्पताल बनाने जैसी सामाजिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी काम करेगी।
रिस्क और निवेशकों के लिए सतर्कता
इतने बड़े पैमाने पर ₹1 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। माइनिंग और मेटल सेक्टर काफी पूंजी प्रधान (Capital Intensive) होते हैं, इसलिए यह देखना जरूरी होगा कि कंपनी इस फंड का इंतजाम कैसे करती है। क्या यह पैसा इंटरनल कैश फ्लो से आएगा या कंपनी पर कर्ज का नया बोझ बढ़ेगा? साथ ही, Hindalco जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के सामने अपनी लागत को नियंत्रित रखना कंपनी की मुनाफे पर पकड़ बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
जमीन और रेगुलेटरी बाधाएं
प्रोजेक्ट का भविष्य सरकारी मंजूरियों और जमीन अधिग्रहण पर टिका है। केवल झारसुगुड़ा में 500 एकड़ जमीन की जरूरत है, और एनवायर्नमेंटल अप्रूवल में देरी से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ सकती है। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी की फाइनेंसिंग योजना क्या है और जमीन अधिग्रहण का काम कितनी तेजी से पूरा होता है।
