Vedanta ने साल 2030 तक अपनी तांबा (Copper) उत्पादन क्षमता को **10 लाख टन** से ऊपर ले जाने के लिए **$2.3 बिलियन** के निवेश का ऐलान किया है। इस प्लान में सऊदी अरब में नए प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ तमिलनाडु स्थित तूतीकोरिन प्लांट को दोबारा शुरू करने की कवायद भी शामिल है।
वैश्विक स्तर पर बड़े विस्तार की तैयारी
Vedanta Limited ने अपने ग्लोबल फुटप्रिंट को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य अगले चार सालों में एक बड़ा सप्लायर बनना है। इस कुल निवेश में से लगभग $2 बिलियन सऊदी अरब में इंटीग्रेटेड ऑपरेशन्स पर खर्च किए जाएंगे। वहां कंपनी एक नया स्मेल्टर और रॉड मिल बना रही है, साथ ही 'जबल सायद' (Jabal Sayid) साइट पर माइनिंग गतिविधियों को भी तेज किया जा रहा है।
तूतीकोरिन प्लांट पर कानूनी दांव-पेच
भारतीय निवेशकों की नजरें तूतीकोरिन प्लांट पर टिकी हैं, जो साल 2018 से पर्यावरणीय विवादों के कारण बंद पड़ा है। कंपनी ने कोर्ट के सामने एक नया 'ग्रीन कॉपर' प्रपोजल रखा है, जिस पर अगले 3 महीनों में फैसला आने की उम्मीद है। यदि कोर्ट से मंजूरी मिलती है, तो कंपनी प्लांट को आधुनिक बनाने और रिन्यूएबल एनर्जी तकनीक के साथ फिर से शुरू करने के लिए $250 मिलियन खर्च करने के लिए तैयार है। मंजूरी मिलने के बाद इस प्रक्रिया में 8 से 9 महीने का समय लग सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
यह ऐलान कंपनी के मई 2026 में हुए बड़े डिमर्जर के बाद आया है, जिसमें एल्युमीनियम, पावर, ऑयल एंड गैस जैसे बिजनेस अलग हो गए थे। 1 अक्टूबर 2026 को Vedanta का शेयर NSE पर लगभग ₹252.05 पर ट्रेड कर रहा था।
हालांकि, निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि तूतीकोरिन प्लांट से जुड़ी कानूनी अनिश्चितताएं अभी भी बरकरार हैं। साथ ही, सऊदी अरब में भारी निवेश के साथ एग्जीक्यूशन और कैपिटल एलोकेशन का रिस्क भी जुड़ा हुआ है। कंपनी अपने कर्ज और कैश फ्लो को कैसे मैनेज करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
