Vedanta का बड़ा कदम: 5 नई कंपनियों में होगा बंटवारा
Vedanta Ltd. अपने बिज़नेस को पांच अलग-अलग कंपनियों में बांटने की एक बड़ी डीमर्जर प्रक्रिया को लगभग पूरा करने के करीब है। इसका मुख्य मकसद कंपनी के अंदर छुपी वैल्यू को सामने लाना और हर एक बिज़नेस को निवेशकों के लिए ज़्यादा सुलभ बनाना है। इस पूरी योजना के mid-June 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती कंपनी के भारी-भरकम कर्ज़ (₹60,600 करोड़ नेट डेट) का इन नई इकाइयों में बंटवारा कैसे होगा, जिस पर इन्वेस्टर्स की पैनी नज़र रहेगी।
डीमर्जर की उम्मीदों पर भागा Vedanta का शेयर
पिछले एक साल में Vedanta के स्टॉक प्राइस में करीब 80% का ज़बरदस्त उछाल आया है, जिसका एक बड़ा कारण इस डीमर्जर की उम्मीदें रही हैं। शेयर का भाव 21 अप्रैल, 2026 को करीब ₹795 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। कंपनी को पांच स्वतंत्र फर्मों में बांटने की योजना को एनालिस्ट्स (Analysts) बिज़नेस की वैल्यूएशन (Valuation) को बेहतर बनाने और फोकस्ड ग्रोथ (Focused Growth) को सपोर्ट करने का तरीका मान रहे हैं। भारतीय मेटल्स और माइनिंग सेक्टर (Metals & Mining Sector) में भी घरेलू डिमांड (Demand) और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) प्रोजेक्ट्स के चलते तेजी दिख रही है, जो इन नई कंपनियों के लिए एक पॉजिटिव माहौल तैयार कर रही है। खास तौर पर, Vedanta Aluminium के टाइट ग्लोबल सप्लाई (Global Supply) और बढ़ती कीमतों के चलते ₹400 प्रति शेयर से ऊपर वैल्यू होने की उम्मीद है।
वैल्यूएशन Snapshot: Vedanta और उसके Competitors
Vedanta का मौजूदा पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) पिछले 12 महीनों में 15.4x से 23.7x के बीच रहा है। यह वैल्यूएशन कुछ घरेलू प्रतिद्वंद्वियों जैसे Hindalco (लगभग 14-15x) और NMDC से ज़्यादा है, लेकिन JSW Steel के मुकाबले हो सकता है, जिसका मल्टीपल (Multiple) काफी ज़्यादा है। भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर का ओवरऑल आउटलुक (Outlook) मजबूत घरेलू मांग के कारण पॉजिटिव है। हालांकि, ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेस (Commodity Prices) और सप्लाई चेन्स (Supply Chains) जियोपॉलिटिकल इश्यूज (Geopolitical Issues) से प्रभावित हो रहे हैं। भारत की एक्सपोर्ट्स (Exports) पर कम निर्भरता स्थानीय उत्पादकों को कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करती है। डीमर्जर का लक्ष्य हर बिज़नेस की अर्निंग पावर (Earning Power) से डेट लेवल्स (Debt Levels) को जोड़ना है। ऑयल एंड गैस (Oil & Gas) और आयरन एंड स्टील (Iron & Steel) यूनिट्स से कम नेट डेट की उम्मीद है, हालांकि कोई भी नई कंपनी पूरी तरह से डेट-फ्री (Debt-free) नहीं होगी।
कर्ज़ की चिंताएं डीमर्जर पर डाल रहीं परछाईं
डीमर्जर से जुड़ी एक बड़ी चिंता Vedanta के ₹60,600 करोड़ के नेट डेट का बंटवारा है। एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि डीमर्जर के बाद स्टॉक प्राइस में भारी गिरावट आ सकती है, जो कि मौजूदा स्तरों से घटकर ₹300-325 तक जा सकता है। यह अनुमान ₹81,000 करोड़ के ग्रॉस डेट (Gross Debt) को पांच नई कंपनियों में कैसे आवंटित किया जाएगा, इस पर निर्भर करता है, जिसमें एल्युमीनियम बिज़नेस (Aluminium Business) पर एक महत्वपूर्ण हिस्सा आने की उम्मीद है। डीमर्जर 30 अप्रैल, 2026 से एक्स-डेट (Ex-date) के रूप में प्रभावी होगा, जिसका मतलब है कि नई इकाइयों को जाने वाले मूल्य को दर्शाने के लिए स्टॉक प्राइस एडजस्ट (Adjust) किया जाएगा। हालांकि कुछ अनुमानों के अनुसार अलग-अलग हिस्सों का कुल मूल्य ₹880–₹900 प्रति शेयर हो सकता है, डीमर्जर के तुरंत बाद के समय में स्टॉक प्राइस में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
एनालिस्ट्स का नज़रिया: 'बाय' रेटिंग बरकरार
थोड़े समय के लिए स्टॉक प्राइस में गिरावट की चिंताओं के बावजूद, अधिकांश एनालिस्ट्स अभी भी Vedanta को 'Strong Buy' रेट कर रहे हैं, जिनका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹859.77 है। कई इन्वेस्टमेंट फर्मों (Investment Firms) ने आशावादी टारगेट दिए हैं। एक फर्म ने 'Hold' की सलाह दी है, जो डीमर्ज्ड कंपनियों के ट्रेडिंग शुरू होने के बाद गेन्स (Gains) की उम्मीद कर रही है। मार्केट का मानना है कि अलग-अलग फोकस वाले बिज़नेस में बंटकर, Vedanta रणनीतिक निवेशकों (Strategic Investors) को आकर्षित करेगा और अधिक विशिष्ट कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital Investment) की अनुमति देगा, जिससे मौजूदा कॉन्ग्लोमेरेट (Conglomerate) सेटअप की तुलना में कुल मिलाकर अधिक वैल्यू मिल सकती है।
