रेगुलेटरी अड़चनें जारी, डीमेरज पर ग्रहण
Vedanta Limited के लिए अपनी बिजनेस यूनिट्स को अलग करने का रास्ता अभी भी मुश्किल बना हुआ है। सरकारी क्लीयरेंस में लगातार हो रही देरी की वजह से कंपनी ने डीमेरज पूरा करने की नई तारीख 30 जून 2026 तय की है। यह तीसरी बार है जब डेडलाइन को बढ़ाया गया है। कंपनी के बोर्ड ने हाल ही में 31 मार्च 2026 की पिछली डेडलाइन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। इन लगातार रेगुलेटरी अड़चनों के चलते, कंपनी की उम्मीदों के मुताबिक स्ट्रक्चरल बदलावों से वैल्यू अनलॉक होने में और अधिक समय लगने की संभावना है।
देरी की वजहें, सरकार और SEBI की आपत्तियां
Vedanta की योजना अपनी डायवर्सिफाइड बिजनेस को पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने की है, लेकिन इसमें कई अहम रेगुलेटरी दिक्कतें सामने आ रही हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिसंबर 2025 में इस प्लान को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, लेकिन केंद्र सरकार और SEBI ने पहले ही इस पर कई गंभीर आपत्तियां जताई थीं। सरकार की मुख्य चिंताओं में फाइनेंशियल रिस्क, पर्याप्त जानकारी का अभाव, एसेट्स का गलत प्रेजेंटेशन और बकाया देनदारियों की वसूली जैसे मुद्दे शामिल थे। SEBI ने भी Vedanta को पर्याप्त डिस्क्लोजर दिए बिना डीमेरज प्लान में बदलाव करने पर चेतावनी जारी की थी, जिससे यह प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
बाजार की प्रतिक्रिया और शेयर का प्रदर्शन
इन तमाम रेगुलेटरी पेंचों के बावजूद, Vedanta के शेयर में हाल के दिनों में कुछ हद तक स्थिरता देखी गई है। 30 मार्च 2026 को शेयर 2.23% की बढ़त के साथ लगभग ₹663.85 पर बंद हुआ था। 2025 के दौरान भी शेयर में लगभग 10% का उछाल देखने को मिला था। मार्केट इन ऑपरेशनल देरी को समझ रहा है, साथ ही मेटल्स और माइनिंग सेक्टर के मजबूत आउटलुक पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। उदाहरण के लिए, 16 दिसंबर 2025 को NCLT से मंजूरी मिलने के बाद शेयर में करीब 4% की तेजी आई थी और यह ₹572.50 पर पहुंचा था, जो दिखाता है कि रेगुलेटरी स्पष्टता शेयर की कीमतों पर कैसे असर डाल सकती है।
सेक्टर की मजबूती बनाम रीस्ट्रक्चरिंग की चुनौतियां
Vedanta के डीमेरज में हो रही देरी ऐसे समय में आई है जब भारत का मेटल्स और माइनिंग सेक्टर 2026 के लिए काफी मजबूत स्थिति में दिख रहा है। एनालिस्टों की मानें तो मजबूत डोमेस्टिक डिमांड, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और ग्लोबल इकोनॉमिक ट्रेंड्स के चलते इस सेक्टर में ग्रोथ की अच्छी उम्मीद है। यह सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अहम है, और इसमें स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर जैसी धातुओं की मांग बढ़ने का अनुमान है। बजट 2026 में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नीतियां भी इंडस्ट्री को सपोर्ट कर रही हैं। हालांकि, Vedanta की अपनी इंटरनल रीस्ट्रक्चरिंग की जटिलताएं इस व्यापक सकारात्मक ट्रेंड से अलग नजर आती हैं।
अहम फाइनेंशियल आंकड़े और शेयर की अस्थिरता
मार्च 2026 तक, कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 12x से 19x के बीच रहा, जो Hindalco Industries (12.36x) और National Aluminium Co Ltd (11.55x) जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ठीक-ठाक है। Vedanta का मार्केट कैप फिलहाल लगभग ₹2.56 ट्रिलियन है। ये वैल्यूएशंस काफी हद तक वाजिब लग रहे हैं, लेकिन डीमेरज प्रोसेस में लगातार हो रही देरी की वजह से शेयर की कीमतों में ऐतिहासिक रूप से काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। उदाहरण के तौर पर, अगस्त 2025 में NCLT की सुनवाई में देरी होने से शेयर 2.75% से ज्यादा गिर गया था, और सितंबर 2025 में सरकारी आपत्तियों के बाद शेयर में लगभग 4% की गिरावट आई थी। मौजूदा स्थिरता शायद निवेशकों के इन देरी के आदी होने या सेक्टर के पॉजिटिव आउटलुक पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने का संकेत दे रही है।
कर्ज़, डिस्क्लोजर और एग्जीक्यूशन पर चिंताएं
भले ही एनालिस्टों की रेटिंग 'Buy' या 'Strong Buy' की ओर इशारा कर रही है और उनके प्राइस टारगेट में काफी अच्छी-खासी अपसाइड की उम्मीद जताई जा रही है, फिर भी कुछ बड़े रिस्क बने हुए हैं। फाइनेंशियल रिस्क, छुपी हुई जानकारी, बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई आय और अनरिपोर्टेड देनदारियों को लेकर सरकार की बार-बार की आपत्तियां, गवर्नेंस या ट्रांसपेरेंसी की समस्याओं का संकेत दे सकती हैं जो भविष्य में फिर से सामने आ सकती हैं। SEBI की चेतावनी ने भी प्रक्रियाओं को फॉलो करने में आने वाली चुनौतियों का इशारा किया था। Vedanta के विविध ऑपरेशंस को अलग करने की जटिलता और कंपनी पर मौजूद भारी कर्ज़ (Debt) प्लान को सफलतापूर्वक एग्जीक्यूट करने में स्वाभाविक जोखिम पैदा करते हैं। Vedanta का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो लगभग 2.1190 है, जो एक अहम फैक्टर है, भले ही Vedanta Resources के लिए कर्ज़ की मैच्योरिटी को बढ़ाया गया हो। नई बनने वाली कंपनियों के बीच देनदारियों को सही ढंग से असाइन करने या कैश फ्लो को मैनेज करने में कोई भी गलती उनके भविष्य के विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी डीमेर्ज्ड बिजनेस के प्रॉफिट अनुमानों में और अधिक अनिश्चितता पैदा करता है।
एनालिस्टों का आशावादी नज़रिया कायम
आगे चलकर, एनालिस्ट डीमेरज से वैल्यू बनने को लेकर काफी हद तक आशावादी बने हुए हैं। ₹686 से ₹890 तक के प्राइस टारगेट बड़ी अपसाइड पोटेंशियल का संकेत दे रहे हैं। उनका मानना है कि अलग-अलग, सेक्टर-फोकस्ड कंपनियां अधिक स्पष्ट वैल्यूएशन हासिल करेंगी और इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करेंगी, जिससे शायद मौजूदा बड़े ग्रुप के कुल मार्केट वैल्यू से ज्यादा वैल्यू बने। इन पांचों एंटिटीज की लिस्टिंग, जो अब अप्रैल से मध्य-मई 2026 तक होनी प्रस्तावित है, अगला अहम पड़ाव होगा। निवेशक करीब से इस बात पर नजर रखेंगे कि Vedanta बाकी रेगुलेटरी कदम कैसे उठाता है और नई कंपनियों के लिए फाइनेंशियल स्टेबिलिटी कैसे सुनिश्चित करता है।