Reliance Contract Boosts Vascon's Order Book
Vascon Engineers ने 18 मई, 2026 को घोषणा की कि उसे Reliance Industries Limited से ₹131.58 करोड़ (GST छोड़कर) का लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। यह ऑर्डर Reliance के जामनगर RG एक्सपेंशन प्रोजेक्ट के लिए है, जिसमें सेक्टर-3 में चार G+12 FLL-टाइप बिल्डिंग्स का निर्माण शामिल है। यह डोमेस्टिक कॉन्ट्रैक्ट बिल ऑफ क्वांटिटीज (BOQ) आधार पर दिया गया है और इसे 19 महीनों के भीतर पूरा करना होगा। इस नए कॉन्ट्रैक्ट से पुणे स्थित इस कंस्ट्रक्शन फर्म को काफी नई आमदनी (Revenue) मिलने की उम्मीद है।
Q4 Results Show Steep Profit Drop
रिलायंस से ऑर्डर मिलने की यह खबर ऐसे समय आई है जब कंपनी ने अपने तिमाही नतीजों (Quarterly Results) में भारी गिरावट दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में Vascon Engineers का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 83% घटकर सिर्फ ₹6 करोड़ रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹34 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 32% गिरकर ₹259 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹385 करोड़ था। वहीं, EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) में 61% की गिरावट आई और यह ₹16 करोड़ पर आ गया। EBITDA मार्जिन भी घटकर 6% हो गया, जो पिछले साल 11% था। एक और वजह यह भी है कि पिछले साल के नतीजों में ₹75 करोड़ का एक एक्सेप्शनल गेन (Exceptional Gain) शामिल था, जो इस बार नहीं था।
Order Backlog Remains Strong Despite Q4 Losses
कमजोर तिमाही परफॉरमेंस के बावजूद, Vascon Engineers के पास अभी भी ₹2,717 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक (Order Book) है। इसमें एक्सटर्नल इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) के ऑर्डर ₹2,387 करोड़ के हैं, और FY26 के लिए ₹762 करोड़ के प्रोजेक्ट इनफ्लो दर्ज किए गए हैं। यह बड़ा ऑर्डर बैकलॉग भविष्य की आमदनी की अच्छी उम्मीद देता है। हालांकि, निवेशकों का भरोसा कम है। कंपनी को प्रोजेक्ट में देरी, लिक्विडिटी की समस्या और EPC सेक्टर में मार्जिन पर चल रहे दबाव जैसी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। 18 मई, 2026 को शेयर BSE पर 4.99% गिरकर ₹33.32 पर बंद हुआ और फिर लोअर सर्किट ₹32.51 पर लगा। यह गिरावट बताती है कि निवेशक कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता और पुराने रिकॉर्ड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
India's Construction Sector: Growth Amidst Margin Pressure
Vascon Engineers भारत के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का हिस्सा है, जिसके FY27 में 6-8% बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन इस सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा और तंग प्रॉफिट मार्जिन हैं। Vascon का P/E रेश्यो करीब 16.2x है, जो NCC Ltd (लगभग 13.4-13.9x) से ज्यादा लेकिन Larsen & Toubro ( 28x-45x) जैसे बड़े खिलाड़ियों से कम है। ₹791 करोड़ के मार्केट कैप वाली स्मॉल-कैप कंपनी होने के नाते, Vascon को बड़े प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बड़े ऑर्डर हासिल करने और स्केल अप करने में अधिक कठिनाई होती है। इसका कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 4.36% और ₹374 करोड़ की बड़ी कॉन्टिजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) भी ऑपरेशनल और फाइनेंशियल चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं।
Persistent Risks Cloud Vascon's Outlook
नए Reliance ऑर्डर के बावजूद, Vascon Engineers को कई बड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी सिर्फ 30.4% है और डिविडेंड (Dividend) का भुगतान भी कम रहा है, जिससे शेयरहोल्डर वैल्यू पर सवाल उठते हैं। पिछले प्रोजेक्ट में देरी, NBFC की समस्याओं के कारण लोन रद्द होना और मुंबई प्रोजेक्ट्स के लिए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस में देरी जैसी समस्याएं कंपनी की एग्जीक्यूशन और रेगुलेटरी कंप्लायंस में कमजोरियां दिखाती हैं। CEO संतोष सुंदरराजन (Santosh Sundararajan) के नेतृत्व में मैनेजमेंट अनुभवी है, लेकिन कंपनी के इतिहास में 2011 में फंड के दुरुपयोग जैसे वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे हैं। EPC सेक्टर में रेगुलेटरी देरी, वेंडर की विफलता, सुरक्षा घटनाएं और लेबर की कमी जैसे जोखिम Vascon के लिए भी बने हुए हैं। शेयर के लिए नेगेटिव टेक्निकल सिग्नल और एनालिस्ट की 'सेल कैंडिडेट' रेटिंग भी बाजार के सतर्क रुख को दर्शाती है।
Looking Ahead: Profitability and Execution Key
Reliance का ऑर्डर फिलहाल कंपनी के लिए एक पॉजिटिव शॉर्ट-टर्म बूस्ट है। हालांकि, कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह प्रॉफिटेबिलिटी कैसे बढ़ाती है, प्रतिस्पर्धा के बीच प्रोजेक्ट्स को प्रभावी ढंग से कैसे मैनेज करती है, और अपने बड़े ऑर्डर बुक का कैसे उपयोग करती है। Vascon के लिए एनालिस्ट फोरकास्ट (Analyst Forecasts) दुर्लभ हैं, और सीमित डेटा या कवरेज के कारण भविष्य की कमाई का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। निवेशक बारीकी से देखेंगे कि क्या Vascon अपने नए ऑर्डरों को स्थिर, लाभदायक ग्रोथ में बदल पाती है, खासकर तब जब भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर लगातार बढ़ रहा है।