Varroc Engineering Share Price: रेवेन्यू में बंपर ग्रोथ, EV सेल्स रॉकेट पर, पर क्यों गिरा नेट प्रॉफिट?

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Author Mehul Desai | Published at:
Varroc Engineering Share Price: रेवेन्यू में बंपर ग्रोथ, EV सेल्स रॉकेट पर, पर क्यों गिरा नेट प्रॉफिट?
Overview

Varroc Engineering के निवेशकों के लिए Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी ने **10.2%** की जोरदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जो **₹22,875 मिलियन** तक पहुंच गई। वहीं, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मॉडल्स की बिक्री में **53%** का ज़बरदस्त उछाल देखा गया। हालांकि, खास खर्चों की वजह से नेट प्रॉफिट (PAT) **-₹113 मिलियन** पर आ गया।

Varroc Engineering की कमाई में दमदार उछाल, EV का जलवा जारी, पर क्यों गिरा नेट प्रॉफिट?

कंपनी के Q3 FY26 के नतीजों से पता चलता है कि Varroc Engineering का रेवेन्यू 10.2% बढ़कर ₹22,875 मिलियन हो गया है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भारतीय ऑपरेशंस में 12.3% की जबरदस्त ग्रोथ से आई है. इस तिमाही में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) वाले मॉडल्स की बिक्री ने तो कमाल ही कर दिया, जो 53% की रफ़्तार से बढ़ी और कुल रेवेन्यू में लगभग 14.3% का योगदान दिया. वहीं, 9 महीने (9M) FY26 की बात करें तो रेवेन्यू 7.7% बढ़कर ₹65,224 मिलियन रहा.

मुनाफे की बात करें तो, खास खर्चों (exceptional items) को छोड़ दें तो कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार दिखा. Q3 FY26 में PBT (Profit Before Tax), JV और खास खर्चों को हटाकर 3.2% से बढ़कर 4.4% हो गया. वहीं, 9M FY26 के लिए यह 3.5% से सुधरकर 4.2% रहा. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 9.3% दर्ज किया गया.

लेकिन, इन सबके बावजूद Q3 FY26 का नेट प्रॉफिट (PAT) ₹-113 मिलियन रहा. इसकी बड़ी वजह ₹1,049 मिलियन के खास खर्चे रहे. इनमें वॉलंटरी सेपरेशन स्कीम (VRS) का लगभग ₹799 मिलियन का खर्चा और नए लेबर कोड से जुड़े खर्च शामिल थे. तिमाही के नतीजे प्रभावित होने के बावजूद, 9M FY26 का PAT ₹1,594 मिलियन पर स्थिर रहा.

कंपनी ने 9M FY26 में अपने सबसे बड़े नेट नए ऑर्डर हासिल किए हैं, जिनकी सालाना पीक रेवेन्यू वैल्यू ₹20,636 मिलियन है. इनमें से 74% से ज़्यादा ऑर्डर EV मॉडल्स के लिए हैं. खासकर, एक ग्लोबल EV OEM के लिए HV PCBA और EV OEMs के लिए 4W लाइटिंग बिजनेस जैसे बड़े ऑर्डर्स मिले हैं.

हालांकि, मैनेजमेंट का फोकस मार्जिन सुधारने, ऑपरेटिंग लीवरेज का फायदा उठाने, फ्री कैश फ्लो (FCF) बढ़ाने और कर्ज घटाने पर है. VRS पर किए गए खर्च से कंपनी की लागत संरचना सुधरने की उम्मीद है, जिसका अनुमानित पेबैक पीरियड लगभग 4 साल है. डोमेस्टिक ऑपरेशंस मजबूत हैं, लेकिन विदेशी बाजार (खासकर अमेरिका) टैरिफ के चलते कुछ चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. निवेशकों को नए EV ऑर्डर्स के इंटीग्रेशन और विदेशी बाजारों की रिकवरी पर नजर रखनी चाहिए. कंपनी का नेट डेट ₹4,405 मिलियन पर पहुँच गया है.

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