Varroc Engineering: रेवेन्यू बढ़ा, पर ₹113 Cr का घाटा! ऑडिटर की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

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AuthorNeha Patil|Published at:
Varroc Engineering: रेवेन्यू बढ़ा, पर ₹113 Cr का घाटा! ऑडिटर की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
Overview

Varroc Engineering ने Q3 FY26 में **₹113.03 करोड़** का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज **₹466.86 करोड़** के मुनाफे से एक बड़ा उलटफेर है। कंपनी का रेवेन्यू **10.23%** बढ़कर **₹22,875.20 करोड़** हो गया, लेकिन **₹1,048.81 करोड़** के भारी-भरकम एक्सेप्शनल आइटम्स ने इस पर असर डाला।

मुनाफे की जगह बड़ा घाटा, क्यों?

Varroc Engineering ने अपने Q3 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, और नंबर चौंकाने वाले हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू तो 10.23% की छलांग लगाकर ₹22,875.20 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही से कहीं ज्यादा है। लेकिन, ₹1,048.81 करोड़ के भारी-भरकम एक्सेप्शनल आइटम्स के चलते, कंपनी को ₹113.03 करोड़ का नेट लॉस उठाना पड़ा है। यह पिछले साल की समान अवधि के ₹466.86 करोड़ के मुनाफे के बिल्कुल उलट है।

इस भारी-भरकम लॉस की मुख्य वजह ₹1,048.81 करोड़ के एक्सेप्शनल आइटम्स रहे। इनमें लेबर कोड्स से जुड़े खर्चे, वॉलंटरी सेपरेशन स्कीम्स (VSS), सब्सिडियरी लिक्विडेशन और पिछले कालों के इम्पेयरमेंट लॉस शामिल हैं। इन एक्सेप्शनल आइटम्स को हटा दें, तो कंपनी का प्रॉफिट बिफोर एक्सेप्शनल आइटम्स 52.26% बढ़कर ₹1,006.64 करोड़ रहा, जो कंपनी के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की मजबूती को दर्शाता है।

स्टैंडअलोन नतीजे और 9 महीने का प्रदर्शन

स्टैंडअलोन बेसिस पर भी कंपनी का रेवेन्यू 12.75% बढ़कर ₹21,151.59 करोड़ हुआ। वहीं, स्टैंडअलोन PAT 29.46% घटकर ₹320.89 करोड़ रहा, जो स्टैंडअलोन एक्सेप्शनल आइटम्स ₹871.37 करोड़ से प्रभावित हुआ। एक्सेप्शनल आइटम्स से पहले, स्टैंडअलोन प्रॉफिट 73.14% बढ़कर ₹1,281.88 करोड़ दर्ज किया गया।

फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9MFY26) की बात करें तो, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 7.72% बढ़कर ₹65,224.09 करोड़ रहा, और PAT में शानदार 243.55% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹1,593.80 करोड़ पर पहुंच गया। स्टैंडअलोन 9-महीने के रेवेन्यू में 9.99% का इजाफा हुआ और यह ₹59,959.02 करोड़ रहा, जबकि PAT 9.57% बढ़कर ₹1,863.71 करोड़ हो गया।

फाइनेंशियल हेल्थ: डेट घटा, पर लिक्विडिटी की चिंता

Varroc Engineering ने डेट कम करने में अच्छी प्रगति की है। स्टैंडअलोन डेट-टू-इक्विटी रेश्यो सुधरकर 0.32 (पिछले साल 0.57) हो गया, और कंसॉलिडेटेड रेश्यो 0.44 (पिछले साल 0.64) पर आ गया। इंटरेस्ट सर्विस कवरेज रेश्यो में भी सुधार देखा गया। हालांकि, लिक्विडिटी अभी भी चिंता का विषय है, क्योंकि स्टैंडअलोन (0.76) और कंसॉलिडेटेड (0.86) दोनों बेसिस पर करंट रेश्यो 1 से नीचे हैं, और वर्किंग कैपिटल निगेटिव है।

सबसे बड़ा रेड फ्लैग: ऑडिटर का क्वालिफाइड कंक्लूजन

नतीजों से सबसे बड़ी चिंता का सबब कंपनी के स्टैच्यूटरी ऑडिटर का क्वालिफाइड कंक्लूजन है, जो स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड दोनों फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर जारी किया गया है। ऑडिटर ने TYC Parties के साथ चल रहे आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) और OPmobility के साथ चल रहे आर्बिट्रेशन का जिक्र किया है। साथ ही, जीएसटी (GST) ऑर्डर्स के बारे में भी बताया गया है, जिनके निष्कर्ष का इंतजार है और जिनके लिए कोई प्रोविजन (प्रावधान) नहीं बनाया गया है। इस क्वालिफिकेशन का मतलब है कि ऑडिटर रिपोर्ट में बताई गई कुछ बातों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, और यह कंपनी के प्रॉफिट बिफोर टैक्स और अन्य अहम मेट्रिक्स पर असली असर का आकलन करना मुश्किल बना देता है।

कंपनी ने नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) पर कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज करने को मंजूरी दी है, जो डेट को और कम करने की दिशा में एक कदम है। लेकिन मैनेजमेंट की ओर से भविष्य के प्रदर्शन पर कोई स्पष्ट गाइडेंस न होना, साथ ही ऑडिटर की गंभीर आपत्तियां, निवेशकों के लिए अनिश्चितता का माहौल बना रही हैं। बाजार अब आर्बिट्रेशन प्रोसीडिंग्स के नतीजों और जीएसटी मामलों के समाधान पर बारीकी से नजर रखेगा।

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