Uttar Pradesh Water Reuse Policy: बड़ी खबर! UP सरकार का पानी के पुनः उपयोग पर बड़ा फैसला, इंफ्रा सेक्टर में क्रांति की उम्मीद

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Uttar Pradesh Water Reuse Policy: बड़ी खबर! UP सरकार का पानी के पुनः उपयोग पर बड़ा फैसला, इंफ्रा सेक्टर में क्रांति की उम्मीद
Overview

उत्तर प्रदेश सरकार ने 'सेफ रीयूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर पॉलिसी, 2026' को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी का मुख्य लक्ष्य **2030** तक **50%** और **2035** तक **100%** ट्रीटेड वेस्टवॉटर (Treated Wastewater) का एग्रीकल्चर (Agriculture) और इंडस्ट्री (Industry) जैसे सेक्टरों में पुनः उपयोग सुनिश्चित करना है।

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अब वेस्टवॉटर बनेगा 'सोना': UP सरकार का बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 'सेफ रीयूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर पॉलिसी, 2026' को अपनी हरी झंडी दिखा दी है। यह पॉलिसी प्रदेश में पानी की कमी को दूर करने और जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इसके तहत, जिन इलाकों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगे हैं, वहां 2030 तक 50% और 2032 तक 100% ट्रीटेड वेस्टवॉटर का रीयूज (Reuse) किया जाएगा। वहीं, जिन इलाकों में STP नहीं हैं, वहां 2030 तक 30% और 2045 तक 100% रीयूज का लक्ष्य रखा गया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (CSE) के सहयोग से बनी यह पॉलिसी वेस्टवॉटर को एक कीमती संसाधन के तौर पर देखती है, जिससे फ्रेश वॉटर (Fresh Water) पर दबाव कम होगा और एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री व कंस्ट्रक्शन (Construction) जैसे कामों के लिए ग्राउंडवॉटर (Groundwater) का इस्तेमाल घटेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आएगी बूम

इस पॉलिसी से भारत के वॉटर (Water) और वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट (Wastewater Treatment) मार्केट में ज़बरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जो 2031 तक 5.17 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट सेक्टर का कुल आकार 2034 तक 19.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यूपी की इस पॉलिसी के साथ-साथ केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) और नमामि गंगे (Namami Gange) जैसी योजनाओं को मिलाकर, 2047 तक ट्रीटेड यूज्ड वॉटर (Treated Used Water) सेक्टर में लगभग 35 अरब डॉलर का अवसर पैदा हो सकता है। इससे 2047 तक एक लाख से ज्यादा नई नौकरियां भी पैदा होने की संभावना है, खासकर STP और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के ऑपरेशन (Operation) और मेंटेनेंस (Maintenance) के क्षेत्र में। Va Tech Wabag Ltd., Enviro Infra Engineers Ltd., और Indian Hume Pipe Company Ltd. जैसी कंपनियां इससे सीधे तौर पर लाभान्वित हो सकती हैं।

राष्ट्रीय चुनौतियां और राज्यों की पहल

पानी के रीयूज पर सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्य भी फोकस कर रहे हैं। गुजरात का लक्ष्य 2030 तक 100% रीयूज हासिल करना है, महाराष्ट्र इंडस्ट्री में इसके इस्तेमाल को अनिवार्य कर रहा है, तमिलनाडु इंडस्ट्री और ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए इसे बढ़ावा दे रहा है, और हरियाणा इंडस्ट्री के लिए इसे प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, पूरे भारत में इसे लागू करने में कई दिक्कतें हैं। फिलहाल, भारत के कुल सीवेज (Sewage) का करीब 28% ही ट्रीट होता है, जिसमें से सिर्फ 3% का ही रीयूज हो पाता है। यह दिखाता है कि पॉलिसी के लक्ष्यों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पॉलिसी का बिखराव (सिर्फ 11 राज्यों की अपनी रीयूज पॉलिसी है), मानकों की अस्पष्टता, विभिन्न एजेंसियों के बीच कोऑर्डिनेशन (Coordination) की कमी और स्थानीय सरकारों के लिए फंडिंग की समस्या जैसी दिक्कतें आम हैं। यूपी की पॉलिसी की सफलता भी इन आम बाधाओं को दूर करने पर निर्भर करेगी।

ऑपरेशनल और फाइनेंशियल मुश्किलें

अपनी दूरदर्शिता के बावजूद, यूपी की पॉलिसी के एग्जीक्यूशन (Execution) में भी जोखिम हैं। भारत की खंडित जल प्रबंधन व्यवस्था एक बड़ी चुनौती है, जहां कई एजेंसियां जिम्मेदारियां बांटती हैं, जिससे अक्सर कोऑर्डिनेशन और एनफोर्समेंट (Enforcement) में कमी आती है। स्थानीय सरकारों, खासकर छोटे शहरों में, फंड की कमी और ट्रीटेड वॉटर के लिए स्पष्ट प्राइसिंग (Pricing) न होने से प्रोजेक्ट्स को मुश्किल हो सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital Investment) की जरूरत, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर 2047 तक 18-27 अरब डॉलर अनुमानित है, एक और बड़ी बाधा है। जनता की स्वीकार्यता और रीयूज्ड वॉटर (Reused Water) के लिए स्टैंडर्ड क्वालिटी रूल्स (Standard Quality Rules) का अभाव भी इसे अपनाने में देरी कर सकता है। प्रदेश की फेज़्ड प्लान (Phased Plan) को सफल बनाने के लिए मज़बूत पॉलिटिकल कमिटमेंट (Political Commitment) और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की ज़रूरत होगी, ताकि अन्य राज्यों के सामने आई ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दिक्कतों पर काबू पाया जा सके।

आगे का रास्ता: सेक्टर में लगातार ग्रोथ

शहरीकरण (Urbanization), औद्योगिकीकरण (Industrialization) और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) पर बढ़ते फोकस के कारण भारत का वॉटर सेक्टर लगातार तरक्की कर रहा है। गवर्नमेंट की फंडिंग, जैसे 2025-26 के बजट में वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹35,189 करोड़ का आवंटन, पॉलिसी के मजबूत समर्थन को दर्शाता है। एनालिस्ट्स (Analysts) बाजार के और विस्तार की उम्मीद कर रहे हैं। अगर यूपी की पॉलिसी अपनी चुनौतियों से पार पा लेती है, तो यह पूरे देश में जल प्रबंधन के लिए इन्वेस्टमेंट (Investment) और इनोवेशन (Innovation) का एक अहम मॉडल बन सकती है। एडवांस्ड और एफिशिएंट वॉटर सॉल्यूशंस (Efficient Water Solutions) की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है, जिससे टेक्नोलॉजी (Technology) और इंफ्रास्ट्रक्चर फर्मों के लिए अवसर पैदा होंगे।

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