नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
कंपनी ने Q3 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, जो काफी मजबूत रहे हैं। Consolidated Revenue 6.6% ईयर-ऑन-ईयर बढ़कर ₹917 करोड़ हो गया। इस बढ़ोतरी में Wire सेगमेंट का योगदान सबसे बड़ा रहा, जो 20.2% बढ़ा, वहीं Wire Rope सेगमेंट में 6.6% की बढ़त देखी गई। हालांकि, LRPC सेगमेंट में 13% की गिरावट आई।
ऑपरेटिंग EBITDA में 23.3% का ज़बरदस्त उछाल आया और यह ₹176 करोड़ पर पहुँच गया। EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 19.2% हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 16.6% था। सबसे खास बात यह है कि नेट प्रॉफिट 16.3% बढ़कर ₹107 करोड़ रहा, भले ही Wage Code के कारण ₹13 करोड़ का एकमुश्त (one-time) खर्च हुआ हो।
पिछले नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो Consolidated Net Revenue ₹2,712 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 5.2% ज़्यादा है। ऑपरेटिंग EBITDA ₹494 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹458 करोड़ था। नौ महीनों का Profit After Tax (PAT) ₹336 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹305 करोड़ से बेहतर है।
वित्तीय सेहत में बड़ा सुधार: डेट खत्म, कैश ही कैश!
Usha Martin ने अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत करने में ज़बरदस्त काम किया है। कंपनी दिसंबर 2025 तक ₹198 करोड़ की नेट कैश पॉजिटिव पोजीशन में पहुँच गई है। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि कंपनी का Gross Debt मार्च 2025 के ₹338 करोड़ से घटकर महज़ ₹172 करोड़ रह गया है।
इतना ही नहीं, कंपनी ने वर्किंग कैपिटल को भी ₹97 करोड़ तक कम किया है, जिसका श्रेय बेहतर इन्वेंटरी और रिसीवेबल मैनेजमेंट को जाता है। 9M FY26 के दौरान Free Cash Flow भी ₹318 करोड़ के स्तर पर मजबूत बना रहा। कंपनी का Return on Capital Employed (ROCE) 20% है, और उनका लक्ष्य इसे 25% तक ले जाने का है।
मैनेजमेंट का भरोसा और भविष्य की रणनीति
कंपनी के मैनेजमेंट का मानना है कि अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) में रेवेन्यू में लगभग डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इस ग्रोथ का मुख्य आधार वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स और स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन जैसे एलिवेटर रोप्स, क्रेन रोप्स और ऑयल व ऑफशोर रोप्स पर ज़ोर देना होगा।
'Ocean Fiber' जैसे नए सिंथेटिक स्लिंग सोल्यूशन की डिमांड अच्छी है और इसे बढ़ाया जाएगा। कंपनी अपने ग्राहक आधार का विस्तार भी कर रही है, जैसे कि सऊदी अरब में 60 नए ग्राहक जोड़े गए हैं। 'One Usha Martin' फ्रेमवर्क लागत कम करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। रांची प्लांट में कैपेसिटी एक्सपेंशन से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कंपनी अगले 2-3 सालों के लिए सालाना ₹250-300 करोड़ का कैपेक्स (Capex) प्लान कर रही है, जिसका इस्तेमाल वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स और संभावित अधिग्रहण (inorganic expansion) के लिए किया जाएगा। मैनेजमेंट का EBITDA मार्जिन का लक्ष्य 19-20% के बीच है।
जोखिम और आगे का रास्ता
LRPC सेगमेंट में आई गिरावट पर नज़र रखनी होगी। इसके अलावा, कंपनी यूरोपीय कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) की तैयारी कर रही है, हालांकि फिलहाल इसका असर कम है। मैनेजमेंट का लक्ष्य वर्किंग कैपिटल डेज़ को घटाकर करीब 180 दिन करना है। कुल मिलाकर, आने वाली तिमाहियों में वॉल्यूम बढ़ने और हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर फोकस जारी रहने से आउटलुक पॉजिटिव लग रहा है।