📉 नतीजों का लेखा-जोखा: क्या हुआ इस तिमाही?
United Van Der Horst Ltd. ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों के अन-ऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। नतीजों से पता चलता है कि कंपनी की बिक्री बढ़ी है, लेकिन लागतों के बेतहाशा बढ़ने के कारण मुनाफे में भारी कमी आई है।
तिमाही प्रदर्शन (Q3 FY26 बनाम Q3 FY25):
- ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 9.74% बढ़कर ₹826.47 लाख हो गया। हालांकि, पिछले क्वार्टर (QoQ) की तुलना में रेवेन्यू 4.41% कम रहा।
- नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 38.41% की भारी गिरावट आई और यह ₹82.45 लाख पर सिमट गया। पिछले क्वार्टर (QoQ) की तुलना में नेट प्रॉफिट 58.68% गिर गया।
- नेट प्रॉफिट मार्जिन भी काफी कम हुआ, जो Q3 FY25 में 17.76% था, वह Q3 FY26 में घटकर 9.98% रह गया।
नौ महीनों का प्रदर्शन (9M FY26 बनाम 9M FY25):
- ऑपरेशंस से रेवेन्यू में साल-दर-साल 22.73% की मजबूत ग्रोथ देखी गई, जो ₹2,600.36 लाख तक पहुंच गया।
- नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 44.08% का इजाफा हुआ और यह ₹486.07 लाख रहा।
- नौ महीनों के लिए ईपीएस (EPS) पिछले साल के ₹0.53 से सुधरकर ₹0.73 हो गया, जो हालिया शेयर स्प्लिट के अनुसार एडजस्ट किया गया है।
मुनाफे में गिरावट की वजह:
तिमाही नतीजों में मुनाफा गिरने का मुख्य कारण कच्चे माल की लागत (Cost of materials consumed) में साल-दर-साल 86.38% की जोरदार बढ़ोतरी है। इसके साथ ही, कुल खर्चों (Total expenses) में 18.77% का इजाफा हुआ। इन बढ़ी हुई लागतों ने रेवेन्यू ग्रोथ पर भारी पड़ते हुए मार्जिन को काफी कम कर दिया।
कंपनी ने यह भी बताया कि नए लेबर कोड (New Labour Codes) के लागू होने के कारण कर्मचारी लाभ व्यय (employee benefit expenses) में ₹5.28 लाख का अतिरिक्त प्रभाव पड़ा है।
निवेशकों की चिंताएं और आगे की राह:
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता कच्चे माल की कीमतों में जारी अस्थिरता और बढ़ोतरी है, जो भविष्य में भी कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। साथ ही, कंपनी प्रॉपर्टी टैक्स बकाया से जुड़े एक कानूनी मामले के नतीजे का इंतजार कर रही है, जो एक संभावित आकस्मिक देनदारी (contingent liability) बन सकती है।
कंपनी ने ₹0.20 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है। इसके अलावा, शेयरधारकों के हित को देखते हुए 1:5 के अनुपात में इक्विटी शेयर स्प्लिट (Equity Share Split) भी पूरा किया गया है, जिससे स्टॉक की लिक्विडिटी (liquidity) बढ़ सकती है।