United Leasing and Industries Limited के शेयरधारकों के लिए राहत की खबर है। कंपनी ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें उसने पिछले साल की इसी अवधि में हुए नुकसान को मुनाफे में बदल दिया है।
कंपनी का रेवेन्यू 14.42% बढ़कर ₹262.83 लाख हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹229.71 लाख था। इस बढ़ोतरी का सीधा असर कंपनी के नेट प्रॉफिट पर दिखा, जो ₹11.93 लाख रहा। यह पिछले साल की Q3 में दर्ज (₹7.84 लाख) के नुकसान से काफी अलग है।
फाइनेंशियल ईयर की पहली नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो, कंपनी का रेवेन्यू 3.74% बढ़कर ₹577.09 लाख पर पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट भी ₹11.93 लाख रहा, जो पिछले साल 9M FY25 में दर्ज (₹7.84 लाख) के नुकसान से बेहतर है।
⚠️ ऑडिटर की रिपोर्ट में चिंताएं
हालांकि, कंपनी के नतीजों के साथ-साथ ऑडिटर की रिपोर्ट में कुछ गंभीर चिंताएं भी सामने आई हैं। स्वतंत्र ऑडिटर ने कंपनी की अकाउंटिंग प्रथाओं पर सवाल उठाए हैं, खासकर दो बातों पर:
- अनबुक्ड इंटरेस्ट इनकम (Unbooked Interest Income): ग्रुप की कंपनियों को दिए गए लोन पर 9.25% प्रति वर्ष की ब्याज दर तय होने के बावजूद, कंपनी ने इस तिमाही के नतीजों में कोई भी ब्याज आय (interest income) दर्ज नहीं की है। इससे कंपनी की आय कम दिख सकती है।
- अनबुक्ड फाइनेंस कॉस्ट (Unbooked Finance Costs): इसी तरह, कंपनी ने खुद जो 9.25% प्रति वर्ष की ब्याज दर पर लोन लिया है, उस पर लगने वाले फाइनेंस कॉस्ट (finance cost) को भी नतीजों में दर्ज नहीं किया है। इससे कंपनी का खर्च कम दिख रहा है।
ऑडिटर की राय भले ही 'अनमॉडिफाइड' (unmodified) हो, लेकिन इन छुपी हुई आय और खर्चों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। यह निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हो सकता है, जिन्हें कंपनी की असली वित्तीय स्थिति समझने के लिए और अधिक जानकारी की जरूरत होगी।