Unimech ने Hobel Bellows के अधिग्रहण से मजबूत की इंजीनियरिंग क्षमता
Unimech Aerospace and Manufacturing Limited ने Hobel Bellows के अधिग्रहण के जरिए अपनी precision engineering और manufacturing स्किल्स को बढ़ाने की एक बड़ी रणनीति बनाई है। इस डील का मकसद Unimech को केवल साधारण कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनी से आगे बढ़कर जटिल सब-सिस्टम्स बनाने वाली एक global player के तौर पर स्थापित करना है। यह अधिग्रहण कंपनी को advanced metal forming, precision pipe bending, robotic welding और testing systems जैसी नई क्षमताओं से लैस करेगा, जिससे यह पूर्ण manufacturing services दे सकेगी।
₹450 करोड़ की डील और दबाव में Unimech
₹450 करोड़ का यह अधिग्रहण Hobel Bellows के लिए काफी ऊंची वैल्यूएशन (valuation) माना जा रहा है। Hobel Bellows का फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए प्राइस-टू-सेल्स रेश्यो (price-to-sales ratio) लगभग 3.46x है। यह तब हो रहा है जब Unimech खुद बाजार की चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी के शेयर 24 मार्च 2026 को अपने ऑल-टाइम लो ₹741.55 पर आ गए थे। मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही में Unimech का रेवेन्यू साल-दर-साल 37.4% घटकर ₹33.72 करोड़ रहा, और नेट प्रॉफिट 84.7% लुढ़ककर सिर्फ ₹2.39 करोड़ पर आ गया। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹5,000 करोड़ है और डेट (debt) कम है, लेकिन मुनाफे का दबाव साफ दिख रहा है।
वैश्विक पहुंच और उत्पादन क्षमता में विस्तार
Hobel Bellows अपने कुल रेवेन्यू का करीब 90% विदेश से कमाती है, जिससे Unimech को तुरंत ग्लोबल ग्राहकों तक पहुंच मिलेगी और इंडस्ट्री में उसकी पहुंच बढ़ेगी। Visakhapatnam SEZ में Hobel का 180,000 वर्ग फुट का प्लांट Unimech की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का भी विस्तार करेगा। इस डील से क्रॉस-सेलिंग (cross-selling) के मौके बनेंगे और मौजूदा सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। भारत का precision engineering सेक्टर 'मेक इन इंडिया' (Make in India) और 'आत्मनिर्भर भारत' (Atmanirbhar Bharat) जैसी सरकारी पहलों से प्रेरित होकर तेजी से बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए चिंताएं और जोखिम
₹450 करोड़ की यह डील Unimech के हालिया वित्तीय नतीजों और शेयर के कमजोर प्रदर्शन को देखते हुए चिंता का विषय बनी हुई है। Unimech के शेयर हाल ही में बाजार और अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी पीछे रहे हैं, जो निवेशकों के कंपनी की अल्पकालिक लाभ क्षमता और उसकी रणनीति की प्रभावशीलता पर संदेह को दर्शाता है। Hobel Bellows के प्रमुख ग्राहक Cummins और Wabtec जैसे बड़े नाम हैं, जिससे क्लाइंट कंसंट्रेशन रिस्क (client concentration risk) भी मौजूद है। Unimech को इस इंटीग्रेशन को सफलतापूर्वक मैनेज करना होगा।
भविष्य की राह और विश्लेषकों की राय
Unimech की रणनीति Hobel Bellows की स्किल्स का उपयोग करके precision engineering में वैल्यू चेन (value chain) में ऊपर चढ़ने पर टिकी है। भारत के precision engineering मार्केट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, सरकारी सहायता और वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव से ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों (analysts) ने Unimech के लिए औसतन ₹1,375 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तर से काफी ऊपर है, हालांकि शेयर का हालिया प्रदर्शन कमजोर रहा है। कंपनी का ₹214 करोड़ का ऑर्डर बुक (order book) 31 मार्च 2026 तक कुछ अल्पकालिक राजस्व स्पष्टता देता है।
