US Tariffs vs AI Fears: सोलर एक्सपोर्टर्स डूबे, IT सेक्टर में लौटी रौनक!

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AuthorAditya Rao|Published at:
US Tariffs vs AI Fears: सोलर एक्सपोर्टर्स डूबे, IT सेक्टर में लौटी रौनक!
Overview

भारतीय शेयर बाजार (Indian Equity Market) में 25 फरवरी 2026 को मिली-जुली चाल देखने को मिली। अमेरिकी सरकार की तरफ से भारतीय सोलर एक्सपोर्ट्स पर लगाए गए **126%** के शुरुआती टैरिफ (Tariffs) के चलते Waaree Energies, Vikram Solar जैसे कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डर से घबराया IT सेक्टर (IT Sector) **3%** से ज्यादा की वापसी करते हुए मजबूती दिखा रहा है, जिसमें HCL Technologies और Infosys सबसे आगे रहे।

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सोलर सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ की मार

अमेरिकी सरकार ने भारत से होने वाले सोलर इंपोर्ट्स (Solar Imports) पर 126% का शुरुआती काउंटरवेलिंग ड्यूटी (Countervailing Duty) लगा दिया है। इस कदम से घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री (Solar Manufacturing Industry) में हड़कंप मच गया है। इसका सबसे बड़ा असर एक्सपोर्ट-हैवी कंपनियों पर पड़ा, जिनमें Waaree Energies के शेयर 14.2% तक लुढ़क गए। Premier Energies और Vikram Solar के शेयरों में भी 10% और 7.5% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। खास बात यह है कि Premier Energies का एक्सपोर्ट एक्सपोजर (Export Exposure) बहुत कम है, लेकिन भावना का असर (Sentiment Spillover) साफ दिखा। Vikram Solar का लगभग 16% और Waaree Energies का करीब 29% कारोबार एक्सपोर्ट्स पर निर्भर करता है, इसलिए वे सीधे तौर पर इस खबर से प्रभावित हुए। हालांकि, Borosil Renewables में मामूली गिरावट दिखी, वहीं Servotech Renewable Power System जैसे शेयरों में मामूली तेजी भी रही, जो चुनिंदा रिएक्शन (Selective Market Reactions) की ओर इशारा करता है। भारत 2026 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बनने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन ऐसे ट्रेड एक्शन (Trade Actions) इसके एक्सपोर्ट-ड्रिवन ग्रोथ (Export-driven Growth) के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं।

AI के डर से IT सेक्टर में लौटी रौनक

Nifty IT इंडेक्स (Index) ने 3.14% की जोरदार वापसी की है। यह रिकवरी (Recovery) ऐसे समय में आई है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित खतरे को लेकर इन्वेस्टर्स (Investors) चिंतित थे। HCL Technologies के शेयर 3% से ज्यादा और Infosys के शेयर करीब 3% चढ़े। TCS और Wipro में भी इसी तरह की तेजी देखी गई। यह उछाल बताता है कि AI-संचालित ऑटोमेशन (AI-driven Automation) के असर को लेकर तात्कालिक डर कुछ कम हुआ है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फरवरी में Nifty IT इंडेक्स ने लगभग $68.6 बिलियन की मार्केट कैप (Market Capitalization) गंवा दी थी। भारतीय IT कंपनियों जैसे TCS (P/E ~19.56-23.96) और Infosys (P/E ~18.4-19.24) के वैल्यूएशन्स (Valuations) ग्लोबल पीयर्स (Global Peers) Accenture (P/E ~17.6-17.8) की तुलना में अभी भी ऊंचे हैं।

फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में खास वजहों से तेजी

Natco Pharma के शेयर 4.78% चढ़ गए। कंपनी को भारत में Semaglutide के लिए CDSCO से अप्रूवल (Approval) मिल गया है। Natco Pharma मार्च 2026 में इस जेनेरिक दवा (Generic Drug) को लॉन्च करने की तैयारी में है, जो Novo Nordisk की ब्लॉकबस्टर दवा के पेटेंट (Patent) एक्सपायरी का फायदा उठाएगा। इस अप्रूवल के साथ, Natco Pharma डायबिटीज (Diabetes) और वजन घटाने वाली दवाओं के तेजी से बढ़ते बाजार में Eris Lifesciences, Sun Pharma, और Dr. Reddy's जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। वहीं, Larsen & Toubro (L&T) के शेयरों में भी हल्की तेजी देखी गई। कंपनी के पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (Power Transmission & Distribution) वर्टिकल को ₹5,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ के बड़े ऑर्डर्स (Orders) मिले हैं। LIGO India प्रोजेक्ट के लिए मिले अतिरिक्त ऑर्डर्स ने भी L&T की मजबूत प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन (Project Execution) क्षमताओं को लेकर सेंटिमेंट (Sentiment) बढ़ाया।

सरकारी स्टेक सेल और ब्लॉक डील्स का असर

Indian Railway Finance Corporation (IRFC) के शेयर 3.9% गिरकर 25 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। इसकी वजह सरकार द्वारा 4% तक हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale - OFS) शुरू करना था। OFS के लिए फ्लोर प्राइस (Floor Price) ₹104 प्रति शेयर तय किया गया था, जो पिछले दिन की क्लोजिंग प्राइस से डिस्काउंट (Discount) पर था। सरकार इस डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) के जरिए करीब ₹5,430 करोड़ जुटाने की उम्मीद कर रही है। यह सरकारी विनिवेश लक्ष्य (Disinvestment Target) का हिस्सा है। दिसंबर 2025 तिमाही में कंपनी के रिकॉर्ड प्रॉफिट (Record Profit) के बावजूद, OFS के दबाव ने स्टॉक पर असर डाला। वहीं, SpiceJet के शेयर 10% के लोअर सर्किट (Lower Circuit) पर बंद हुए, क्योंकि BSE पर बड़ी मात्रा में ब्लॉक डील्स (Block Deals) हुईं, जिनमें इसके करीब 8.4% शेयर बदले।

वैल्यूएशन गैप और सेक्टरों में मतभेद

बाजार का वर्तमान रुख साफ तौर पर सेक्टरों के बीच बड़े अंतर को दिखाता है। जहां अमेरिकी टैरिफ ने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सोलर निर्माताओं पर गहरा असर डाला है, वहीं IT सेक्टर AI से जुड़े जोखिमों और रिकवरी के बीच उलझा हुआ है। दूसरी ओर, खास अप्रूवल्स और मजबूत ऑर्डर बुक्स से लाभान्वित होने वाले फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर अधिक सुरक्षित दिख रहे हैं।

जोखिम कारक और भविष्य का अनुमान

सोलर सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम अमेरिका जैसे बड़े एक्सपोर्ट बाजारों की संरक्षणवादी व्यापार नीतियां (Protectionist Trade Policies) हैं। IT सेक्टर में AI टूल्स द्वारा सेवाओं के ऑटोमेशन (Automation) का खतरा बना रहेगा। फार्मा में प्रतिस्पर्धा और नियामक अप्रूवल्स पर निर्भरता जोखिम है। IRFC लगातार सरकारी स्टेक सेल के दबाव का सामना करेगा। SpiceJet की परिचालन व्यवहार्यता (Operational Viability) भी अनिश्चित बनी हुई है। जैसे-जैसे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बन रहा है, इस सेक्टर का विकास घरेलू मांग और सरकारी सहायता पर निर्भर करेगा। IT सेक्टर की वैल्यूएशन्स (Valuations) बनाए रखने के लिए AI को अपनी सेवाओं में एकीकृत करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर में सकारात्मक रुझान जारी रहने की उम्मीद है। सरकारी डिसइन्वेस्टमेंट योजनाएं PSU स्टॉक्स पर दबाव बनाए रखेंगी। विश्लेषकों की IT सेक्टर पर सतर्क नजर है, जबकि सोलर एक्सपोर्टर्स को तत्काल व्यापार नीति चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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