Transrail Lighting को अपने विस्तार और विविधीकरण (Diversification) के लिए ₹600 करोड़ जुटाने की मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने QIP के जरिए फंड जुटाने का फैसला लिया है ताकि FY27 में 20-22% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
फंड जुटाने की रणनीति
मुंबई की EPC कंपनी Transrail Lighting ने इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए बड़ी चाल चली है। कंपनी ने ₹600 करोड़ तक की पूंजी Qualified Institutions Placement (QIP) के जरिए जुटाने की योजना बनाई है। 10 सितंबर, 2026 को डाक मतपत्र (Postal Ballot) के जरिए इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है, जिससे कंपनी को भविष्य की बड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय मजबूती मिलेगी।
नए बिजनेस में एंट्री
कंपनी अब सिर्फ पावर ट्रांसमिशन तक सीमित नहीं रहना चाहती। मैनेजमेंट का फोकस अब डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) जैसे उभरते सेक्टरों पर है। कंपनी अपनी पुरानी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
मजबूत ऑर्डर बुक और फाइनेंस
फाइनेंशियल फ्रंट पर कंपनी का प्रदर्शन दमदार रहा है। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹1,736 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹108 करोड़ रहा। कंपनी के पास जून 2026 तक ₹16,035 करोड़ की भारी-भरकम ऑर्डर बुक है। साथ ही, हाल ही में अक्टूबर में ₹412 करोड़ और सितंबर के अंत में ₹574 करोड़ के नए ऑर्डर्स भी मिले हैं। कंपनी ने प्रति शेयर ₹3 का अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया है और UAE स्थित सहायक कंपनी Transrail Trading LLC में ₹40.25 करोड़ का निवेश करने का फैसला लिया है।
निवेशकों के लिए सावधानियां
एक्सपेंशन के साथ कुछ जोखिम भी हैं। सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और उधारी की बढ़ती लागत कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए चुनौती बन सकती है। अब निवेशकों की नजर QIP लॉन्च होने की टाइमिंग और ऑर्डर बुक को कितनी तेजी से पूरा किया जाता है, इस पर टिकी रहेगी।
