Tinna Rubber & Infrastructure Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों (9MFY26) के नतीजे जारी किए हैं। इस तिमाही में कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले ज़बरदस्त सुधार देखने को मिला है। कंपनी की स्ट्रेटेजिक प्लानिंग और हालिया ऑर्डर्स भविष्य के लिए अच्छी तस्वीर पेश कर रहे हैं।
तिमाही के नतीजे (Q3 FY26 vs Q3 FY25)
कंपनी ने इस तिमाही में 53% की जोरदार बढ़त के साथ ₹23 करोड़ का EBITDA दर्ज किया। EBITDA मार्जिन भी 4.2% बढ़कर 16.3% पर पहुंच गया। वहीं, Profit After Tax (PAT) में 63% की शानदार उछाल आई और यह ₹13 करोड़ रहा। PAT मार्जिन सुधरकर 9.2% हो गया। इसके अलावा, डाइल्यूटेड EPS में 52% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹7.22 रहा।
नौ महीनों का प्रदर्शन (9MFY26 vs 9MFY25)
नौ महीनों (9MFY26) की बात करें तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 3% की बढ़ोतरी के साथ ₹389 करोड़ दर्ज किया गया। EBITDA 11% बढ़कर ₹65 करोड़ रहा और मार्जिन 110 बेस पॉइंट बढ़कर 16.7% पर पहुंच गया। हालांकि, कंसोलिडेटेड PAT में 1% की मामूली गिरावट आई और यह ₹36 करोड़ रहा। कंपनी ने इसकी वजह साउथ अफ्रीका और सऊदी अरब में अपने नए इंटरनेशनल ज्वाइंट वेंचर्स (JV) के शुरुआती सेटअप कॉस्ट को बताया है। वहीं, अकेले (Standalone) 9MFY26 नतीजों में EBITDA और PAT दोनों 12.5% की दर से बढ़े।
'विजन 2028' और भविष्य की रणनीति
कंपनी ने 'विजन 2028' नाम से एक महत्वाकांक्षी प्लान पेश किया है, जिसके तहत FY28 तक ₹1,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य है। इसके लिए 25% से ज़्यादा का रेवेन्यू CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) चाहिए होगा। इस विजन में EBITDA मार्जिन को मौजूदा 15% (FY25) से बढ़ाकर 18% से ऊपर ले जाने और ROCE को 26% (FY25) से बढ़ाकर 30% से ऊपर पहुंचाने का लक्ष्य है। ग्रोथ के मुख्य ड्राइवर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर सेगमेंट होंगे, जिसमें एक्सपोर्ट पर खास फोकस रहेगा। कंपनी Q4 FY26 के अंत तक एक्सपोर्ट वॉल्यूम में 30% की बढ़ोतरी का लक्ष्य लेकर चल रही है। सऊदी अरब और साउथ अफ्रीका में विस्तार, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में विविधता लाना और R&D में निवेश कंपनी की स्ट्रेटेजिक प्राथमिकताएं हैं।
फाइनेंशियल हेल्थ और कैपिटल एलोकेशन
9M FY26 में ₹79 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) पूरा हो चुका है, और FY26-FY27 के लिए ₹50 करोड़ का अतिरिक्त प्लान है। हाल ही में ₹78.7 करोड़ के Qualified Institutional Placement (QIP) से जुटाए गए पैसों को भी सोच-समझकर इस्तेमाल किया गया है। इसमें ₹23 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज कम करने में, ₹22.42 करोड़ पायरोलिसिस और रिकवर्ड कार्बन ब्लैक (rCB) प्रोजेक्ट्स में, और ₹10.5 करोड़ सोलर पावर विस्तार में किया गया है। कंपनी की बैलेंस शीट में वित्तीय सेहत में सुधार दिख रहा है, जो H1 FY26 में नेट डेट टू इक्विटी रेशियो में कमी से भी जाहिर होता है।
IOCL से मिला बड़ा ऑर्डर
इस अवधि के दौरान एक बड़ी उपलब्धि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) से जनवरी 2026 में मिला ₹75.79 करोड़ (GST सहित) का वर्क ऑर्डर है, जिसमें क्रम्ब रबर मॉडिफायर की सप्लाई की जाएगी। यह ऑर्डर दो साल में पूरा किया जाएगा और इससे कंपनी की डोमेस्टिक मार्केट में पोजीशन और मजबूत होगी।
जोखिम और चिंताएं
हालांकि outlook सकारात्मक है, लेकिन कुछ संभावित जोखिमों में एंड-ऑफ-लाइफ टायर (ELT) इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव, ग्लोबल इकोनॉमिक हेडविंड्स और फॉरेन एक्सचेंज फ्लक्चुएशन्स शामिल हैं। साउथ अफ्रीका और सऊदी अरब के इंटरनेशनल वेंचर्स से हुए शुरुआती नुकसान ने कंसोलिडेटेड 9M PAT को प्रभावित किया है, जो एक चिंता का विषय है।