अमेरिका की दिग्गज कंपनी Thermo Fisher Scientific भारत में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही है। कंपनी नए R&D और कस्टमर सेंटर्स खोल रही है ताकि भारत के बढ़ते बायोसिमिलर्स और रिसर्च सेक्टर का फायदा उठाया जा सके। इस कदम से फार्मा इनोवेशन और एक्सपोर्ट में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
भारत पर Thermo Fisher का बढ़ता फोकस
Thermo Fisher Scientific भारत में अपने परिचालन को काफी मजबूत कर रही है। कंपनी बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। लैब इक्विपमेंट की दुनिया की यह लीडर कंपनी अब भारतीय बाजार पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है, जो इसके एशिया-प्रशांत और मध्य-पूर्व ऑपरेशंस के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।
नई इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
इस विस्तार के तहत, कंपनी ने हैदराबाद के जीनोम वैली में एक स्पेशलाइज्ड बायोप्रोसेस डिजाइन और कस्टमर एक्सपीरियंस सेंटर स्थापित किया है। इसके अलावा, बेंगलुरु में अपने R&D सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का विस्तार करने के लिए करीब ₹160 करोड़ का निवेश किया है। इन सेंटर्स का मकसद स्थानीय वैज्ञानिकों को एडवांस्ड ट्रेनिंग और टेक्निकल सपोर्ट देना है, ताकि वेSophisticated लैब इक्विपमेंट और ऑटोमेशन सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।
भारत का बढ़ता बायोफार्मा हब
यह निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत खुद को ग्लोबल बायोफार्मा इनोवेशन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी कर रहा है। भारत का बायोसिमिलर मार्केट 2030 तक बढ़कर $4.2 बिलियन होने का अनुमान है। ऐसे में, भारतीय फार्मा कंपनियां हाई-वैल्यू वाली दवाओं पर फोकस कर रही हैं। Thermo Fisher का विस्तार इसी बदलाव का फायदा उठाने के लिए है, क्योंकि स्थानीय निर्माताओं को घरेलू और एक्सपोर्ट डिमांड को पूरा करने के लिए रिसर्च, डेवलपमेंट और हाई-क्वालिटी प्रोडक्शन के लिए एडवांस्ड इक्विपमेंट की जरूरत है।
ग्लोबल परफॉर्मेंस और स्ट्रेटेजी
न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड अपनी पैरेंट कंपनी के स्तर पर, Thermo Fisher की ग्लोबल परफॉर्मेंस भी मजबूत बनी हुई है। 2026 की दूसरी तिमाही में, कंपनी ने $11.99 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 10% ज्यादा है। कंपनी अपने पोर्टफोलियो को भी सुव्यवस्थित कर रही है, हाल ही में $1.075 बिलियन में अपने माइक्रोबायोलॉजी बिजनेस को Astorg को बेचा है। यह कदम कॉर्पोरेट स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, जो बायोप्रोसेसिंग और लैब टेक्नोलॉजी जैसे हाई-ग्रोथ एरिया में कैपिटल एलोकेशन पर फोकस कर रहा है।
बिजनेस रिस्क और भविष्य की राह
हालांकि यह विस्तार भारतीय बाजार में कंपनी के विश्वास को दर्शाता है, लेकिन Thermo Fisher को बिजनेस से जुड़े कुछ जोखिमों का सामना भी करना पड़ सकता है। साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंटेशन स्पेस के कई ग्लोबल प्लेयर्स की तरह, कंपनी ग्लोबल सप्लाई चेन के दबावों के प्रति संवेदनशील है, जिसका असर स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट की डिलीवरी पर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी का ग्रोथ मॉडल मर्जर और एक्विजिशन पर काफी निर्भर करता है, जिसमें इंटीग्रेशन की चुनौतियां और एक्वायर्ड टेक्नोलॉजीज के वैल्यूएशन को सही ठहराने का जोखिम शामिल है।
भारत में, कंपनी को फार्मा और बायोलॉजिक्स सेक्टर के बदलते रेगुलेटरी माहौल से भी निपटना होगा। निवेशक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स इन नई सुविधाओं के उपयोग और बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर के परिपक्व होने के साथ-साथ ग्लोबल और उभरते हुए घरेलू प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले मार्केट शेयर बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर नजर रखेंगे।
