वैल्यूएशन की चिंता, पर ऑपरेशनल परफॉरमेंस शानदार!
प्रभादास लिलाधर (Prabhudas Lilladher) ने Thermax के स्टॉक को 'Accumulate' से घटाकर 'Reduce' कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने अपनी अर्निंग्स एस्टिमेट्स को मार्च 2028 तक आगे बढ़ाया है और Thermax के मुख्य बिजनेस का वैल्यूएशन 39x रखा है, जो पहले 37x था। यह हाई मल्टीपल बताता है कि स्टॉक में हालिया तेजी शायद मुनाफे की ग्रोथ से थोड़ी आगे निकल गई है।
पिछले क्वार्टर में कंपनी ने 10.7% का रेवेन्यू ग्रोथ और 88 बेसिस पॉइंट का EBITDA मार्जिन सुधार हासिल कर इसे 10.6% तक पहुंचाया है। कंसोलिडेटेड ऑर्डर इनफ्लो को ₹16.3 अरब के एक बड़े बॉयलर ऑर्डर से बढ़त मिली है। इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स डिविजन, खासकर हीटिंग, कूलिंग और वॉटर सॉल्यूशंस में, अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
सेगमेंट में मुश्किलें, पर डेटा सेंटर में उम्मीद
हालांकि, प्रोडक्ट मिक्स के फेवरेबल न होने से कुल मुनाफे पर असर पड़ा। केमिकल्स सेगमेंट में सप्लाई चेन की दिक्कतें और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण प्रॉफिट मार्जिन गिरे हैं। ग्रीन सॉल्यूशंस सेगमेंट में प्रोजेक्ट कॉस्ट ओवररन के चलते नुकसान जारी रहा। मैनेजमेंट ने चेतावनी दी है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में फैब्रिकेशन के लिए गैस की अनुपलब्धता और केमिकल्स व इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर में कच्चे माल व सप्लाई चेन की दिक्कतों से चुनौतियां आ सकती हैं।
कंपनी डेटा सेंटर्स के क्षेत्र में ग्रोथ की उम्मीद कर रही है और जल्द ही कूलिंग व हीटिंग सिस्टम्स के लिए इंटरनेशनल ऑर्डर आने की उम्मीद है।
इंडस्ट्री पीयर्स के मुकाबले महंगा वैल्यूएशन
Thermax का मौजूदा वैल्यूएशन अपने प्रतिस्पर्धियों से काफी अलग है। इसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹49,834 करोड़ है, और TTM (Trailing Twelve Months) P/E रेश्यो करीब 73-79x है। यह इंडस्ट्री एवरेज 34x और कंट्री एवरेज 29x से बहुत ज्यादा है। अपार इंडस्ट्रीज (Apar Industries) 62.59x, सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) 36.17x, सीमेंस इंडिया (Siemens India) 69.6x, और कमिंस इंडिया (Cummins India) 42.3x जैसे पीयर्स के मुकाबले Thermax प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।
एक्जीक्यूशन रिस्क और मार्जिन पर दबाव
मुख्य चिंताएं, मजबूत ऑर्डर बुक और रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, एक्जीक्यूशन में दिक्कतें और प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट हैं, खासकर इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन सॉल्यूशंस में। डिलीवरी में देरी से रेवेन्यू रिकग्निशन प्रभावित हुआ है। अधूरे सिविल वर्क, कॉन्ट्रैक्टर की समस्याएं और क्लाइंट्स द्वारा साइट तैयार करने में देरी से कैश फ्लो और वर्किंग कैपिटल पर भी असर पड़ता है। एक मामले में, ग्रीन सॉल्यूशंस सेगमेंट को Q4 में कॉन्ट्रैक्टर की विफलता के कारण ₹29 करोड़ का नुकसान हुआ, जिस पर Thermax को अतिरिक्त लागत लगानी पड़ी। केमिकल्स सेगमेंट का मुनाफा बढ़ी इनपुट कॉस्ट, ग्लोबल अस्थिरता, बढ़ी स्टील की कीमतों और फेवरेबल प्रोडक्ट मिक्स की कमी से प्रभावित है। मैनेजमेंट का इंडस्ट्रियल इंफ्रा में बड़े सुपरक्रिटिकल पावर प्रोजेक्ट्स से बचने का फैसला इस सेगमेंट की चुनौतियों को दिखाता है। 50x जैसे हाई P/E रेश्यो (Sep'26E, नवंबर 2024 के अनुसार) एक बड़ा रिस्क हैं अगर ग्रोथ धीमी होती है या एक्जीक्यूशन की समस्याएं फिर से आती हैं।
