लागत का दबाव और घटता मुनाफा
Techno Electric & Engineering Company के शेयर तिमाही नतीजों के बाद बुरी तरह पिटे हैं। जहां एक ओर कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 23.8% बढ़कर ₹1,010.04 करोड़ हो गया, वहीं दूसरी ओर नेट प्रॉफिट में 15% की गिरावट आई और यह ₹114.51 करोड़ पर आ गया। कंपनी का कहना है कि बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट और कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।
मजबूत ऑर्डर बुक पर भी चिंता
Techno Electric के पास ₹9,500 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर बुक है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। लेकिन, हालिया नतीजों से यह साफ है कि सिर्फ बड़ा ऑर्डर बुक होना ही काफी नहीं है। कुल खर्चों में 16.7% की बढ़ोतरी ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डेटा सेंटर और एनर्जी ट्रांजीशन जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार के साथ-साथ कंपनी को कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग और बढ़ती लागत के बीच प्रॉफिट बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं
तिमाही नतीजों के अलावा, कुछ और बातें भी निवेशकों को परेशान कर रही हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि वर्किंग कैपिटल डेज में बढ़ोतरी हुई है, जो कैश कन्वर्जन में संभावित समस्या का संकेत देता है। इसके अलावा, अफगानिस्तान और बंगाल एनर्जी लिमिटेड के पुराने प्रोजेक्ट्स से ₹885 मिलियन से अधिक के बकाया भुगतान में देरी पर ऑडिटर ने भी सवाल उठाए हैं। हालांकि मैनेजमेंट का मानना है कि यह रकम वसूल हो जाएगी, पर लंबी देरी से कैश फ्लो की क्वालिटी पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले तीन सालों में प्रमोटर होल्डिंग में आई कमी भी चिंता का विषय है।
भविष्य की राह और डिविडेंड
बाजार की नकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद, Techno Electric का भविष्य भारत के इंडस्ट्रियल कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल से जुड़ा हुआ है। कंपनी के बोर्ड ने ₹7 प्रति शेयर के डिविडेंड का प्रस्ताव दिया है, जो कंपनी की लिक्विडिटी पर मैनेजमेंट के भरोसे को दिखाता है। निवेशक भविष्य की रिपोर्टों पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी मार्जिन रिकवरी और बकाए के कलेक्शन में कैसे सुधार करती है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी में कंपनी का फोकस आगे चलकर महत्वपूर्ण साबित होगा।
