ग्रीन टेक का कमाल, शेयर में रिकॉर्ड उछाल
टाटा स्टील (Tata Steel) अपने कार्बन उत्सर्जन (CO2 Emissions) को कम करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। कंपनी ने SMS Group के साथ मिलकर अपने जमशेदपुर प्लांट में दुनिया की पहली EASyMelt टेक्नोलॉजी को लागू करने का फैसला किया है। इस पहल का लक्ष्य 50% से ज्यादा CO2 उत्सर्जन कम करना और 2045 तक नेट-जीरो (Net-Zero) लक्ष्य हासिल करना है। बाजार ने इस ग्रीन पुश का जोरदार स्वागत किया है। नतीजतन, पिछले कुछ हफ्तों में शेयर में करीब 17% की तेजी आई है, और पिछले एक साल में तो यह 52% से भी ज्यादा उछल चुका है। इसकी तुलना में, Nifty 50 इंडेक्स की वापसी सिर्फ 1.66% रही है। शेयर फिलहाल अपने 52-हफ्ते के हाई ₹216.50 के करीब कारोबार कर रहा है।
हाई वैल्यूएशन पर सवाल?
इस शानदार परफॉरमेंस के बावजूद, टाटा स्टील की मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो, जो पिछले 12 महीनों के हिसाब से 28.82 से 30.70 के बीच है, अपने 10-साल के औसत 8.15 से काफी ऊपर है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स इसे 26.73 बता रही हैं, जो अभी भी इंडस्ट्री एवरेज 29.48 से थोड़ा कम है, लेकिन अपने ऐतिहासिक स्तरों से काफी बढ़ा हुआ है। अगर प्रतिस्पर्धियों की बात करें तो JSW Steel का P/E रेश्यो 40.73-50.6 के आसपास है, जबकि SAIL का P/E 25.68 है। स्टील सेक्टर में सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च (7.4% 2026 में और 9.2% 2027 में अनुमानित) के कारण अच्छी मांग बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन, मौजूदा शेयर की कीमत काफी ज्यादा उम्मीदें दिखा रही है।
जोखिम और एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
कई फैक्टर्स टाटा स्टील के आउटलुक को प्रभावित कर सकते हैं। डीकार्बनाइजेशन (Decarbonisation) पहलों के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) एक बड़ी चुनौती है। EASyMelt जैसी नई टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (Electric Arc Furnaces) के लिए शुरुआती खर्च से मार्जिन और कैश फ्लो पर दबाव आ सकता है, खासकर अगर कच्चे माल की कीमतें ऊपर-नीचे होती रहें। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। कुछ 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग और ₹250 तक के टारगेट दे रहे हैं, जबकि हालिया कंसेंसस 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग के साथ ₹165-₹185 का एवरेज टारगेट दे रहा है। यह राय का अंतर भविष्य की कमाई और मौजूदा स्टॉक प्राइस की स्थिरता को लेकर अनिश्चितता को दर्शाता है। ग्लोबल स्टील मार्केट को भी मध्य पूर्व के संघर्ष और चीन में मांग की सुस्ती से झटका लग रहा है।
आगे क्या? सब कुछ एग्जीक्यूशन पर निर्भर
आगे चलकर, एनालिस्ट्स को भारतीय स्टील मार्केट में सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, टाटा स्टील के शेयर की कीमत का नियर-टर्म आउटलुक एनालिस्ट्स की अलग-अलग राय पर टिका है, जिनके प्राइस टारगेट ₹165 से ₹250 तक हैं। डीकार्बनाइजेशन टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करने, कैपिटल एक्सपेंडिचर मैनेज करने और ग्लोबल मार्केट की वोलेटिलिटी से निपटने में कंपनी की सफलता ही तय करेगी कि उसका मौजूदा वैल्यूएशन प्रीमियम टिकाऊ है या नहीं। निवेशक Q4 FY26 नतीजों, FY27 गाइडेंस और ग्रीन इन्वेस्टमेंट्स के मुनाफे पर पड़ने वाले असर पर बारीकी से नजर रखेंगे।
