Q4 नतीजे और डिविडेंड पर होगा फैसला
टाटा स्टील अपने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए चौथे तिमाही (Q4) और पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के ऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजे आज घोषित करने जा रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स 15 मई को इन नतीजों की समीक्षा करेंगे। एजेंडे का एक अहम हिस्सा इस फाइनेंशियल ईयर के लिए फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश करना होगा। यह घोषणा निवेशक सेंटीमेंट के लिए महत्वपूर्ण होगी और वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और शेयरहोल्डर रिटर्न की जानकारी देगी।
पिछली तिमाही में दमदार प्रदर्शन
इससे पहले, कंपनी ने Q3 FY26 में शानदार परफॉरमेंस दिखाते हुए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सात गुना बढ़त दर्ज की थी, जो ₹2,689 करोड़ रहा। यह रेवेन्यू में 6% की बढ़त के साथ ₹57,002 करोड़ पर पहुंचा था। इसी मजबूत प्रदर्शन के चलते शेयर का भाव भी चढ़ा है। पिछले एक साल में स्टॉक 45.39% बढ़ा है और हाल ही में 7 मई, 2026 को यह ₹219.20 के 52-हफ्ते के हाई (52-week high) पर पहुंचा था।
ग्लोबल स्टील सेक्टर पर दबाव
हालांकि, टाटा स्टील को इस बार कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री इस समय भारी दबाव में है। एशिया में उत्पादन बढ़ने और ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितताओं से स्थिति और बिगड़ी है, जिससे कीमतें लगातार गिर रही हैं। साल 2026 में ग्लोबल स्टील डिमांड में मामूली 0.3% की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि चीन की डिमांड 1% घट सकती है। यह तस्वीर भारत के बिल्कुल विपरीत है, जहां 2026 कैलेंडर ईयर में डिमांड में 7.4% की मजबूत वृद्धि का अनुमान है। टाटा स्टील, जिसकी भारत में 21.6 MTPA और यूरोप में 12 MTPA की स्टील कैपेसिटी है, को इन अलग-अलग बाजारों की स्थितियों से निपटना होगा। बढ़ती रॉ मटेरियल और एनर्जी कॉस्ट भी प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर रही है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कॉस्ट मैनेजमेंट बहुत अहम हो गए हैं।
वैल्यूएशन और भविष्य की राह
टाटा स्टील का मौजूदा P/E रेश्यो लगभग 26.78 से 30.05 के बीच है, जो फेरस मेटल इंडस्ट्री के औसत P/E (लगभग 27.56) से थोड़ा कम है। वहीं, JSW Steel का P/E रेश्यो 37.13 से 41.53 के बीच है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹2.71 लाख करोड़ है। कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे यूरोप में कंपनी के ऑपरेशंस में ऐतिहासिक रूप से दिक्कतें आई हैं और 'ग्रीन स्टील' के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत है। इसके अलावा, हाई डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी एक संभावित जोखिम हो सकता है।
भविष्य की ग्रोथ का भरोसा
भविष्य को देखते हुए, टाटा स्टील भारत में सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और शहरीकरण से स्टील की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। कंपनी की 2030 तक अपनी डोमेस्टिक कैपेसिटी को 300 MTPA तक ले जाने की योजना है और उसने हाल ही में एक स्क्रैप-बेस्ड EAF ग्रीन स्टील प्लांट भी चालू किया है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि Q4 FY26 के लिए रेवेन्यू ₹53,000–56,000 करोड़ और EPS लगभग ₹2.80 रह सकता है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी सरकारी नीतियों से भविष्य में ग्रोथ को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
