UK में मुनाफे की ओर Tata Steel
Tata Steel के यूरोपीय कारोबार, खासकर UK में, सुधार के अच्छे संकेत दिख रहे हैं। कंपनी के एग्जीक्यूटिव्स को उम्मीद है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में यह घाटे से निकलकर ऑपरेटिंग ब्रेकइवन (breakeven) हासिल कर लेगा। इस रिकवरी का मुख्य कारण यूरोप में स्टील की कीमतों का बढ़ना है, जो ट्रेड मेजर्स जैसे कोटा, सेफगार्ड और नए कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे नियमों के कारण संभव हुआ है। इन नीतियों ने यूरोप और अमेरिका के स्टील प्राइस गैप को कम किया है, जिससे कंपनी के लिए फेवरेबल मार्केट बनी है। लागत में आक्रामक कटौती भी इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर रही है। हालांकि, नीदरलैंड्स में रेगुलेटरी बातचीत जारी है, पर मैनेजमेंट का कहना है कि इससे कोई नई देनदारी (liability) अपेक्षित नहीं है।
India में प्रोडक्शन का महाविस्तार!
वहीं, Tata Steel भारत में अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए एक बड़ी योजना पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य ऑर्गेनिक, ब्राउनफील्ड ग्रोथ के जरिए कुल प्रोडक्शन कैपेसिटी को 48 मिलियन टन तक ले जाना है। इसके लिए इंजीनियरिंग और रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के साथ ही विस्तार की घोषणाएं की जाएंगी। खास तौर पर, कलिंगनगर (Kalinganagar) की क्षमता बढ़ाकर 16 मिलियन टन, नीलांचल (Neelachal) की 10 मिलियन टन, और मेरामांडाली (Meramandali) की 10 मिलियन टन की जाएगी। कंपनी अगले तीन से चार सालों में दक्षिण और पश्चिम भारत में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (Electric Arc Furnaces) भी स्थापित करने की योजना बना रही है। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹20,000 करोड़ का बड़ा कैपेक्स (Capital Expenditure) बजट तय किया गया है, जिसमें से करीब 65% भारत में निवेश किया जाएगा और 35% विदेशी ऑपरेशंस पर खर्च होगा। यह विशाल विस्तार भारत की मजबूत मार्केट ग्रोथ (जो सालाना 7-8% अनुमानित है) के अनुरूप है।
संभावित जोखिम और विश्लेषकों का नज़रिया
इन सकारात्मक डेवलपमेंट के बावजूद, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। UK में ब्रेकइवन की राह यूरोपीय स्टील प्राइस के उतार-चढ़ाव और वैश्विक ट्रेड नीतियों पर निर्भर करेगी। CBAM जैसे नियमों से कुछ स्टील उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। भारत में बड़े पैमाने पर विस्तार में एग्जीक्यूशन रिस्क और भारी कैपिटल कॉस्ट शामिल हैं। साथ ही, JSW Steel जैसे घरेलू प्रतिद्वंद्वी भी अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा तेज होगी। विश्लेषकों का मानना है कि Tata Steel की यह डाइवर्सिफाइड स्ट्रैटेजी (diversified strategy) कंपनी को यूरोपीय रिकवरी और भारत की ग्रोथ, दोनों का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है।