Tata Steel ब्रिटेन सरकार के साथ मिलकर अपने Port Talbot प्रोजेक्ट की पावर ग्रिड संबंधी बाधाओं को सुलझाने की कोशिश कर रही है। **1.25 बिलियन पाउंड** का यह इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की टाइमिंग बेहद अहम है।
पोर्ट टैलबोट में पावर की चुनौती
टाटा स्टील अपने ब्रिटेन स्थित पोर्ट टैलबोट प्लांट में एक बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी यहां ट्रेडिशनल ब्लास्ट फर्नेस की जगह 3.2 मिलियन टन क्षमता वाला इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) लगाने के लिए 1.25 बिलियन पाउंड का निवेश कर रही है। इसका मुख्य लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन में 90% की कटौती करना है। हालांकि निर्माण कार्य तो तय शेड्यूल पर चल रहा है, लेकिन अब पावर सप्लाई को लेकर एक बड़ी रुकावट सामने आई है।
कंपनी अब ब्रिटिश सरकार के साथ इमरजेंसी बातचीत कर रही है ताकि नेशनल ग्रिड से समय पर बिजली कनेक्शन मिल सके। इस प्रोजेक्ट को सरकार से 500 मिलियन पाउंड की मदद भी मिली है, इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर का समय पर तैयार होना प्रोजेक्ट की सफलता के लिए अनिवार्य है।
क्या है निवेशकों के लिए रिस्क?
अगर साल 2027 की डेडलाइन तक ग्रिड कनेक्टिविटी नहीं मिली, तो भारी-भरकम निवेश के बावजूद यह फर्नेस पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएगा। इससे कंपनी पर लागत का दबाव बढ़ सकता है, जो पहले ही यूके ऑपरेशंस में काफी चुनौतीपूर्ण रहा है।
भारतीय मार्केट का सहारा
एक तरफ जहां ग्लोबल चुनौतियां हैं, वहीं Tata Steel के लिए भारत का मजबूत बिजनेस एक बड़ा 'बफर' बना हुआ है। भारत में स्टील की मांग जबरदस्त है और हाल ही में कीमतों में आई तेजी ने ग्लोबल हेडविंड्स के असर को कम किया है। हालांकि, कोकिंग कोल की कीमतों में 50 से 60 डॉलर प्रति टन का उछाल मार्जिन पर दबाव डाल रहा है। अब निवेशकों की नजरें सरकार के साथ होने वाली बातचीत के नतीजों पर टिकी हैं, जो इस बड़े औद्योगिक बदलाव की दिशा तय करेंगे।
