Tata Steel: भारत में डिमांड का दम, लेकिन नीदरलैंड प्रोजेक्ट में देरी; जानें क्या है पूरा अपडेट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tata Steel: भारत में डिमांड का दम, लेकिन नीदरलैंड प्रोजेक्ट में देरी; जानें क्या है पूरा अपडेट

Tata Steel ने फिस्कल ईयर 2026 की दूसरी छमाही में घरेलू स्टील डिमांड में **8-10%** की ग्रोथ का अनुमान जताया है। हालांकि, नीदरलैंड के IJmuiden प्लांट के लिए ग्रीन स्टील एग्रीमेंट की डेडलाइन को मार्च **2027** तक बढ़ा दिया गया है।

घरेलू बाजार में उम्मीद की किरण

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में जारी मजबूती के चलते कंपनी मैनेजमेंट काफी पॉजिटिव है। कंपनी को उम्मीद है कि कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोटिव और कैपिटल गुड्स जैसे कोर सेक्टर से मांग बनी रहेगी, जो कंपनी के रेवेन्यू में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

नीदरलैंड प्लांट के सामने चुनौतियां

कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर राह आसान नहीं दिख रही है। IJmuiden प्लांट में ग्रीन स्टील ट्रांजिशन के लिए पर्यावरणीय नियमों (Environmental Regulations) को लेकर बातचीत जारी है। मुख्य विवाद कोक और गैस प्लांट के बंद होने और स्टील स्लैग के मैनेजमेंट को लेकर है। जब तक डच सरकार के साथ ये मसले नहीं सुलझते, तब तक प्लांट के मॉडर्नाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।

डेट मैनेजमेंट और बैलेंस शीट

कंपनी अपनी बैलेंस शीट को रिस्क-फ्री बनाने की कोशिश में जुटी है। अब कंपनी का कुल कर्ज का केवल 18% ही विदेशी मुद्रा में रह गया है। इस रणनीति का मकसद विदेशी करेंसी के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचना है। 1 अक्टूबर, 2026 को कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ₹178.00 पर बंद हुआ था।

निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी किस तरह से कच्चे माल की कीमतों (कोकिंग कोल और आयरन ओर) में उतार-चढ़ाव के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रख पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.