Tata Steel के पोर्ट टैलबोट मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट को बड़ा झटका लगा है। ग्रिड कनेक्टिविटी में देरी के कारण अब यह प्रोजेक्ट **2029** तक खिंच सकता है, जिससे लागत **£1.25 बिलियन** के बजट को पार करने की आशंका है। इस अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत का असर कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर पड़ सकता है।
प्रोजेक्ट में क्यों आई देरी?
कंपनी अपने प्लांट को इलेक्ट्रिक-बेस्ड फर्नेस टेक्नोलॉजी में बदल रही है, ताकि ग्रीन स्टील का प्रोडक्शन किया जा सके। लेकिन ग्रिड कनेक्शन में आ रही रुकावटों ने इस काम को धीमा कर दिया है। इसी वजह से अब प्रोजेक्ट पूरा होने की डेडलाइन 2029 कर दी गई है।
बढ़ता बजट और सरकारी बातचीत
शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का बजट £1.25 बिलियन तय किया गया था, जिसमें £500 मिलियन की सरकारी ग्रांट भी शामिल थी। लेकिन अब पावर इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों और बढ़ती महंगाई के कारण लेबर और रॉ मटेरियल की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी ओवररन को देखते हुए Tata Steel अब UK सरकार के 'Department for Business, Innovation, Science and Technology' के साथ नए सिरे से बातचीत कर रही है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
Tata Steel के यूरोपीय ऑपरेशंस लंबे समय से कंपनी के लिए एक चुनौतीपूर्ण हिस्सा रहे हैं। अगर UK में फंड की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय पैरेंट कंपनी को अतिरिक्त पैसा डालना पड़ा, तो इसका सीधा असर कंपनी के कैश फ्लो पर पड़ेगा। फिलहाल, निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या सरकार अतिरिक्त मदद देगी और इसका रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) पर क्या असर पड़ेगा।
यह सिर्फ एक कंपनी की समस्या नहीं है, बल्कि ग्लोबल स्टील सेक्टर में ग्रीन ट्रांजिशन के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
