Tata Steel ने भारत में अपने प्लांट्स में प्रोडक्शन में **11%** की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जिसका मुख्य कारण ऑटोमोटिव और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की मजबूत बिक्री रही। हालांकि, कंपनी के यूरोप ऑपरेशंस में प्लांट ट्रांजिशन और मेंटेनेंस शटडाउन के चलते प्रोडक्शन पर दबाव बना हुआ है।
भारत में Tata Steel की धांसू परफॉर्मेंस
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में Tata Steel के डोमेस्टिक ऑपरेशंस ने दमदार ग्रोथ दिखाई है। कंपनी का भारत में क्रूड स्टील प्रोडक्शन पिछले साल की समान अवधि के 5.23 मिलियन टन की तुलना में 11% बढ़कर 5.82 मिलियन टन पर पहुंच गया। डोमेस्टिक डिलीवरीज़ में भी 11% की बढ़ोतरी हुई और यह 5.17 मिलियन टन रही, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स से लगातार मिल रही डिमांड का सहारा मिला।
इंडिया में सेगमेंट के अनुसार परफॉर्मेंस
भारतीय बाजार में इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह ऑटोमोटिव और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स जैसे हाई-वैल्यू सेगमेंट्स रहे। ऑटोमोटिव और स्पेशल प्रोडक्ट्स डिवीजन ने लगभग 0.9 मिलियन टन का उत्पादन किया, जो कि पहली तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा वॉल्यूम है। कलिंगानगर फैसिलिटी में कंटीन्यूअस एनीलिंग और गैल्वनाइजिंग लाइन्स के ऑपरेशनल रैंप-अप ने इसमें अहम भूमिका निभाई, जिससे प्रीमियम ऑटोमोटिव स्टील की बिक्री में 20% की ग्रोथ आई। इसी तरह, ब्रांडेड प्रोडक्ट्स एंड रिटेल सेगमेंट ने पहली तिमाही में रिकॉर्ड 1.7 मिलियन टन का वॉल्यूम हासिल किया, जिसमें Tata Tiscon और Tata Steelium जैसे पॉपुलर ब्रांड्स की ग्रोथ शामिल है।
यूरोप और इंटरनेशनल ऑपरेशंस में मुश्किलें
भारत की शानदार परफॉर्मेंस के विपरीत, कंपनी के यूरोप ऑपरेशंस अभी भी स्ट्रक्चरल चुनौतियों से जूझ रहे हैं। Tata Steel Netherlands ने 1.55 मिलियन टन लिक्विड स्टील का उत्पादन किया, लेकिन तिमाही की शुरुआत में डायरेक्ट शीट प्लांट के शटडाउन के कारण प्रोडक्शन प्रभावित हुआ। कंपनी रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद ट्रायल रन कर रही है, लेकिन इन ट्रांजिशन्स का असर फिलहाल वॉल्यूम पर पड़ रहा है। वहीं, यूके सेगमेंट में 0.48 मिलियन टन की डिलीवरी दर्ज की गई, क्योंकि यह पोर्ट टैलबोट साइट पर 3 मिलियन टन प्रति वर्ष के नए इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) के कमीशनिंग की ओर बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशकों के लिए, डोमेस्टिक डिमांड की मजबूती और इंटरनेशनल एसेट्स के रीस्ट्रक्चरिंग के बीच संतुलन सबसे अहम रहेगा। जहां भारत ऑपरेशंस एक मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स का फायदा उठा रहे हैं, वहीं इंटरनेशनल प्रॉफिटेबिलिटी एजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिशन कॉस्ट्स के कारण दबाव में है। शेयरहोल्डर्स की नजरें यूके में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस प्रोजेक्ट की प्रगति पर रहेंगी, क्योंकि इसका सफल कमीशनिंग यूरोप में कंपनी के फुटप्रिंट की एफिशिएंसी और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, कलिंगानगर प्लांट में लगातार बेहतर एग्जीक्यूशन हाई-वैल्यू प्रोडक्ट ग्रोथ की मौजूदा गति को बनाए रखने के लिए जरूरी होगा।
