नतीजों का सार: डिलीवरी ही किंग!
कंपनी की इस बेहतरीन परफॉरमेंस का मुख्य आधार बनीं अब तक की सबसे बड़ी तिमाही डिलीवरी, जो 6.04 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। इस बड़ी बिक्री ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को 6.3% बढ़ाकर ₹57,002 करोड़ तक पहुंचाया और EBITDA में 39% की भारी उछाल लाकर ₹8,309 करोड़ कर दिया।
भारत में रॉकेट स्पीड, विदेश में मिली-जुली कहानी
भारत में कंपनी के ऑपरेशंस ने इस बार जोरदार लीड ली, जहाँ डिलीवरी में 14% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की गई। भारत से रेवेन्यू ₹35,725 करोड़ रहा, जिसमें 23% का सॉलिड EBITDA मार्जिन मिला। वहीं, क्रूड स्टील प्रोडक्शन भी 12% बढ़कर 6.34 मिलियन टन तक पहुंच गया। विदेशों में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। नीदरलैंड्स में EBITDA में लगभग तीन गुना की बढ़ोतरी देखी गई और यह €55 मिलियन पर पहुँच गया। वहीं, यूके ऑपरेशंस ने अपने EBITDA लॉस को 44% तक सुधारा और इसे £63 मिलियन तक सीमित कर लिया।
नौ महीनों के दौरान (9MFY26) की बात करें तो, कंसोलिडेटेड EBITDA में 31% का शानदार इजाफा हुआ और यह ₹24,894 करोड़ रहा।
इन्वेस्टमेंट, डेट और लिक्विडिटी
इस तिमाही में Capital Expenditure (कैपेक्स) ₹3,291 करोड़ रहा, जिससे नौ महीनों का कुल कैपेक्स ₹10,370 करोड़ तक पहुँच गया। कंपनी की बैलेंस शीट भी मजबूत हुई है, जहाँ नेट डेट में ₹5,206 करोड़ की कमी आई और यह ₹81,834 करोड़ हो गया। कंपनी की लिक्विडिटी ₹44,062 करोड़ पर अच्छी बनी हुई है।
भविष्य की राह: एक्सपेंशन, अधिग्रहण और लागत में कटौती
भविष्य की रणनीति पर कंपनी का जोर है। मैनेजमेंट ने इंडिया बिजनेस के लिए ग्रोथ प्लान्स को दोहराया है, जिसमें वॉल्यूम बढ़ाना, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो बढ़ाना, माइनिंग एसेट्स हासिल करना और नई सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी अपनाना शामिल है। रणनीतिक तौर पर, Tata Steel Colors Pvt Ltd में अपनी हिस्सेदारी को मजबूत किया जा रहा है और Thriveni Pellets Private Limited में 50.01% की बड़ी हिस्सेदारी खरीदी जा रही है।
क्षमता विस्तार के प्रोजेक्ट्स भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। NINL में 4.8 MTPA का विस्तार किया जा रहा है और लुधियाना में 0.75 MTPA का EAF प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है। कंपनी अपने कॉस्ट ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम्स से भी लगातार बचत कर रही है, जिससे इस तिमाही में ₹3,000 करोड़ और नौ महीनों में ₹8,600 करोड़ की बचत हुई है।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि, कंपनी कुछ चुनौतियों का भी सामना कर रही है। भारत में डोमेस्टिक डिमांड भले ही मजबूत हो, लेकिन ग्लोबल ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट जटिल है। चीन से बढ़ता एक्सपोर्ट और भू-राजनीतिक तनाव बड़ी चिंताएं हैं। यूके मार्केट की हालत भी अभी सुस्त है। इन सबके बीच, Tata Steel अपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी मैन्युफैक्चरिंग में AI के इस्तेमाल और एडवांस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए कस्टमर एंगेजमेंट बढ़ाने पर काम कर रही है।