भारत में शानदार परफॉरमेंस, यूरोप में गिरावट
Tata Steel का भारत में परफॉरमेंस उम्मीदों से कहीं बेहतर रहा। मार्च 2026 तिमाही (Q4FY26) में, डोमेस्टिक डिलीवरी वॉल्यूम 6.19 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 10.5% ज्यादा है। इस जबरदस्त ग्रोथ की मुख्य वजह भारत के मजबूत ऑटोमोटिव सेक्टर से मिली मांग और कलिंगानगर (Kalinganagar) प्लांट में प्रोडक्शन कैपेसिटी का बढ़ना है। कंपनी के ऑटोमोटिव और स्पेशल प्रोडक्ट्स डिवीजन ने अकेले करीब 1 मिलियन टन का वॉल्यूम दर्ज किया।
इसके विपरीत, यूरोप में स्थिति थोड़ी डांवाडोल रही। Tata Steel Netherlands ने 1.7 मिलियन टन का फ्लैट वॉल्यूम रिपोर्ट किया, जो पिछले साल के बराबर है। यह यूरोप की कमजोर इकोनॉमी, एनर्जी प्राइस शॉक और भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर दिखाता है। UK में कंपनी के वॉल्यूम में 17% की बड़ी गिरावट देखी गई और यह 0.52 मिलियन टन पर आ गया, जो यूरोपियन मार्केट्स की चुनौतियों को साफ दर्शाता है।
£1.25 बिलियन का बड़ा ग्रीन स्टील निवेश
यूरोप की चुनौतियों के बावजूद, Tata Steel लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी के तहत UK में एक बड़ा और महत्वपूर्ण निवेश कर रही है। कंपनी £1.25 बिलियन की लागत से पोर्ट टैलबोट (Port Talbot) में एक नया इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) प्लांट लगाने की तैयारी में है। यह प्लांट 2027 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है और सालाना 3 मिलियन टन स्टील का प्रोडक्शन करेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन (Emissions) को करीब 90% तक कम करने का लक्ष्य रखेगा। इस ग्रीन स्टील प्रोडक्शन के लिए UK सरकार £500 मिलियन का फंड भी दे रही है।
ग्लोबल ट्रेंड्स और वैल्यूएशन
कुल मिलाकर, Tata Steel के एशिया और यूरोप ऑपरेशंस का कंसोलिडेटेड डिलीवरी वॉल्यूम 5.3% बढ़कर 8.75 मिलियन टन हो गया। ग्लोबल स्टील प्राइस में साल-दर-साल करीब 3% से 5% की बढ़ोतरी देखी गई। यह बढ़त आयरन ओर (Iron Ore) और कोकिंग कोल (Coking Coal) जैसे इनपुट कॉस्ट में वृद्धि, और मिडिल ईस्ट टेंशन के कारण शिपिंग फ्रेट रेट्स (Shipping Freight Rates) के महंगा होने से आई है। भारत के 12% के इंपोर्ट स्टील पर सेफगार्ड ड्यूटी (Safeguard Duty) और चीन द्वारा प्रोडक्शन कट (Production Cuts) ने भी ग्लोबल प्राइस को सहारा दिया है।
कंपनी का P/E 26.4x और मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹230,000 करोड़ है। यह पीयर कंपनी SAIL (P/E 22.9x, मार्केट कैप ₹65,000 करोड़) और JSW Steel (P/E 37.6x, मार्केट कैप ₹200,000 करोड़) की तुलना में अलग तस्वीर पेश करता है।
बड़े रिस्क और एनालिस्ट व्यू
हालांकि, कंपनी के सामने कुछ बड़े रिस्क भी हैं। यूरोपियन मार्केट की कमजोरी और हाई एनर्जी कॉस्ट एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पोर्ट टैलबोट में £1.25 बिलियन का EAF प्रोजेक्ट, जो डीकार्बोनाइजेशन के लिए जरूरी है, उसमें कॉस्ट ओवररन (Cost Overrun) या देरी जैसे एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risks) शामिल हैं। कंपनी का वैल्यूएशन, पीयर SAIL की तुलना में थोड़ा प्रीमियम पर है, जो इस बड़े इन्वेस्टमेंट से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क को दर्शा सकता है।
Analyst का Tata Steel पर व्यू मिला-जुला है। भारतीय ऑपरेशंस की मजबूती और ग्रीन ट्रांजिशन की जरूरत को स्वीकार करते हुए, UK EAF प्रोजेक्ट के इंटीग्रेशन और कैपिटल इंटेन्सिटी (Capital Intensity) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। टारगेट प्राइस आमतौर पर ₹220 से ₹240 के बीच हैं, जो थोड़ी तेजी का संकेत देते हैं, लेकिन सावधानी भी बरतने को कहते हैं। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से भारतीय स्टील सेक्टर को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, लेकिन यूरोपियन मार्केट की चुनौती और पोर्ट टैलबोट प्रोजेक्ट का सफल एग्जीक्यूशन भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।