भारत में शानदार कमाई, शेयरधारकों को डिविडेंड
Tata Steel ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल की इसी अवधि के ₹1,201 करोड़ की तुलना में 146% बढ़कर ₹2,965 करोड़ पर पहुंच गया। इस जबरदस्त उछाल की मुख्य वजह भारत में मजबूत मांग और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स रही। कंपनी के भारतीय ऑपरेशन्स ने अकेले इस तिमाही में ₹4,640 करोड़ का मुनाफा कमाया।
पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो Tata Steel का मुनाफा 243% बढ़कर ₹10,886 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹3,174 करोड़ था। तिमाही में रेवेन्यू 12.5% बढ़कर ₹63,270 करोड़ और पूरे साल के लिए 6.22% बढ़कर ₹2,32,140 करोड़ रहा। कंपनी ने ₹4 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है।
नीदरलैंड्स में लाइसेंस रद्द होने का खतरा
जहां भारत में कंपनी का प्रदर्शन शानदार है, वहीं यूरोप में Tata Steel को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नीदरलैंड्स में कंपनी के बिज़नेस का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) पिछले साल के ₹132 करोड़ से बढ़कर ₹624 करोड़ हो गया। हालांकि, डच ऑपरेशन्स के लिए एक बड़ा खतरा सामने आ गया है।
डच अथॉरिटीज ने 23 अप्रैल 2026 को कंपनी को नोटिस भेजा है, जिसमें स्टील प्रोडक्शन के लिए बेहद जरूरी कोकिंग ओवन प्लांट्स के ऑपरेटिंग परमिट रद्द करने का इरादा जताया गया है। इसका कारण एमिशन्स (उत्सर्जन) नियमों का उल्लंघन बताया जा रहा है। कंपनी पर पहले ही एमिशन्स वायलेशन के लिए करीब €27 मिलियन (लगभग ₹240 करोड़) का जुर्माना लग चुका है। अथॉरिटीज का कहना है कि कोकिंग ओवन प्लांट्स काफी पुराने (40-50 साल) हैं और उनके लिए कोई यूनिवर्सल टेक्निकल सॉल्यूशन उपलब्ध नहीं है। एक दूसरे प्लांट के लिए भी कंपनी पर लगभग €10 मिलियन (लगभग ₹88 करोड़) का जुर्माना लगाया गया है।
मार्केट का क्या कहना है?
Tata Steel का P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो करीब 30-39 के आसपास है, जो कुछ अन्य स्टील कंपनियों जैसे JSW Steel (P/E 37-51) से ऊपर है। विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। 'मॉडरेट बाय' की कंसेंसस रेटिंग है, लेकिन 12-महीने के टारगेट प्राइस में ₹165 से लेकर ₹229.71 तक का बड़ा अंतर है। यह अंतर यूरोप की अनिश्चितता को दर्शाता है।
आगे क्या उम्मीद करें?
कंपनी FY26 के लिए ₹14,026 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) प्लान कर रही है और उसने नेट डेट को ₹2,285 करोड़ तक कम किया है। कंपनी की रणनीति भारत में मजबूत प्रदर्शन जारी रखने पर टिकी है, लेकिन डच रेगुलेटरी स्थिति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।