भारत में बम्पर कमाई, यूरोप में चिंता
Tata Steel के लिए 31 मार्च 2026 को खत्म हुई चौथी तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू FY26 में 6.2% बढ़कर ₹2.32 लाख करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट में 243% का जबरदस्त उछाल आकर ₹10,886 करोड़ हो गया। सिर्फ चौथी तिमाही की बात करें तो रेवेन्यू 12.5% बढ़कर ₹63,270 करोड़ पर पहुंचा और नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा होकर ₹2,926 करोड़ हो गया। EBITDA में भी पूरे साल के लिए 35% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹34,848 करोड़ रहा।
कंपनी का असली स्टार रहा उसका इंडियन ऑपरेशन्स, जिसने रिकॉर्ड क्रूड स्टील प्रोडक्शन और डिलीवरी हासिल की। FY26 में इंडियन यूनिट्स का रेवेन्यू ₹1.40 लाख करोड़ रहा और EBITDA मार्जिन 24% दर्ज किया गया। इस घरेलू मजबूती ने कंपनी को ग्लोबल अनिश्चितताओं से निपटने में मदद की।
यूरोप का हाल बेहाल: मुश्किलों में कंपनी
भारत में दमदार प्रदर्शन के बावजूद, Tata Steel के यूरोप ऑपरेशन्स को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नीदरलैंड्स (Netherlands) बिजनेस ने FY26 में EBITDA में तीन गुना की बढ़ोतरी के साथ €267 मिलियन दर्ज किए, लेकिन यह गंभीर रेगुलेटरी दिक्कतों से जूझ रहा है। इसमें कोक और गैस प्लांट को जल्दी बंद करने की संभावना भी शामिल है। Tata Steel Netherlands के फाइनेंशियल स्टेटमेंट में 'गोइंग कंसर्न' (going concern) स्टेटस को लेकर मटेरियल अनिश्चितता को ध्यान में रखा गया है। वहीं, यूके (UK) में EBITDA के नुकसान लगभग आधे हो गए हैं, जो कॉस्ट रीस्ट्रक्चरिंग में कुछ सुधार का संकेत देते हैं, लेकिन यह सेगमेंट अभी भी लॉस में है। ये लगातार यूरोप की समस्याएं भारत की मजबूत परफॉर्मेंस के मुकाबले एक बड़ा बैलेंसिंग फैक्टर बनी हुई हैं।
वैल्यूएशन पर सवाल, एनालिस्ट का भरोसा
फिलहाल, Tata Steel का शेयर अपने हिस्टोरिकल 10-साल के औसत P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) रेश्यो 8.16 के मुकाबले काफी महंगा दिख रहा है। स्टॉक करीब 25-30x के P/E पर ट्रेड कर रहा है। इसके बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट इस पर पॉजिटिव बने हुए हैं। Motilal Oswal ने FY28 अनुमानों के आधार पर ₹250 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। कंसेंसस टारगेट प्राइस ज्यादातर ₹215-217 के आसपास है, जबकि कुछ ₹255 तक का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि, कुछ एनालिसिस यह भी बता रहे हैं कि मौजूदा मल्टीपल्स के हिसाब से स्टॉक "सिग्निफिकेंटली ओवरवैल्यूड" (Significantly Overvalued) हो सकता है।
ग्लोबल स्टील मार्केट का मिजाज
दुनियाभर में स्टील मार्केट में मामूली रिकवरी के संकेत हैं। 2026 में वैश्विक स्टील मांग में 0.3% की वृद्धि का अनुमान है, जो 1.72 बिलियन टन तक पहुंच सकती है। चीन में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण मांग स्थिर होने की उम्मीद है। भारत महत्वपूर्ण ग्रोथ ड्राइवर बना हुआ है, जहां सरकारी पहलों के चलते स्टील मांग 7.4% बढ़ने का अनुमान है। यूरोप में भी डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के कारण मांग बढ़ने का पूर्वानुमान है। वहीं, मध्य पूर्व (Middle East) में क्षेत्रीय संघर्षों के चलते मांग में तेज गिरावट की आशंका है।
यूरोप की अनिश्चितता और महंगा वैल्यूएशन: क्या है जोखिम?
जहां भारत का डोमेस्टिक बिजनेस ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की मजबूत कहानी पेश कर रहा है, वहीं Tata Steel का यूरोप में एक्सपोजर एक बड़ा रिस्क है। नीदरलैंड्स में रेगुलेटरी जांच और संभावित प्लांट बंद होने की स्थिति इस सेगमेंट के भविष्य पर सवाल खड़े करती है। यह भारत के मजबूत प्रदर्शन से बिल्कुल अलग है। स्टॉक का मौजूदा महंगा वैल्यूएशन, जो इसके ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर है, करेक्शन का शिकार हो सकता है। अगर यूरोप में सुधार उम्मीद से धीमा रहा या भू-राजनीतिक अस्थिरता या बढ़ते प्रोटेक्शनिज्म के कारण वैश्विक स्टील की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट आती है, तो मौजूदा प्रीमियम शायद उचित न हो। इसके अलावा, कंपनी का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (FY26 में ₹14,026 करोड़) और TM International Logistics में अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदना, मौजूदा वैल्यूएशन को सहारा देने के लिए पर्याप्त रिटर्न देना होगा।
आगे का रास्ता और रणनीतिक कदम
Tata Steel ने FY26 के लिए ₹4 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। कंपनी ने लुधियाना में 0.75 MTPA का इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस भी चालू किया है और लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाने के लिए TM International Logistics में अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी है। कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है, जिससे नेट डेट में ₹2,285 करोड़ की कमी आई है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे ऑपरेशनल डिसिप्लिन, कॉस्ट ट्रांसफॉर्मेशन और डी-लीवरेजिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि मुश्किल ग्लोबल बिजनेस एनवायरनमेंट से निपटा जा सके। कंपनी का लॉन्ग-टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, जो अनुमानित कमाई वृद्धि और यूरोप के ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक मैनेज करने पर निर्भर करेगा।