Tata Steel: डच रेगुलेशन और प्रोजेक्ट में देरी का असर
JP Morgan ने Tata Steel को ₹220 के टारगेट प्राइस के साथ 'न्यूट्रल' रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पिछले एक साल में शेयर में 38% की बड़ी तेजी के बावजूद, नीदरलैंड्स में रेगुलेटरी खर्च और प्रोजेक्ट में देरी जैसी चुनौतियां हैं। डच प्लांट में संभावित जल्दी शटडाउन से रॉ मटेरियल, माल ढुलाई और रीस्ट्रक्चरिंग की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, CO2 की कम लागत से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। यूके में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) प्रोजेक्ट बिजली कनेक्टिविटी की समस्या के चलते 6-8 महीने लेट हो गया है, और भारत-NINL का फाइनल इन्वेस्टमेंट डिसीजन जुलाई-सितंबर तक टल गया है। Q1 FY27 के लिए मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, लेकिन नीदरलैंड्स में एमिशन लिमिट पार करने से उत्पादन घटने से मार्जिन पर दबाव आ सकता है। ब्रोकरेज ने FY28 के EBITDA को 2% घटाया है। हाल ही में, Q4 FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 147% बढ़कर ₹2,965 करोड़ रहा था, लेकिन निवेशकों ने भविष्य के जोखिमों पर ध्यान देते हुए शेयर में 3.7% की गिरावट देखी। कंपनी का भारतीय कारोबार मजबूत है, लेकिन 24.25x का P/E रेश्यो घरेलू साथियों (जैसे JSW Steel का 18x) से अधिक है।
SAIL: मजबूत परफॉर्मेंस और मार्जिन ग्रोथ की उम्मीद
दूसरी ओर, Steel Authority of India Limited (SAIL) पर Investec ने भरोसा जताया है और ₹270 के टारगेट प्राइस के साथ 'बाय' रेटिंग दी है। फर्म ने Q4 FY26 में SAIL के मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की तारीफ की है, जहां EBITDA अनुमान से 19% ज्यादा रहा, जिसका मुख्य कारण मार्जिन में सुधार है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि Q1 FY27 में मार्जिन ₹2,200/tonne तक बढ़ सकता है। मैनेजमेंट ने FY27 के लिए 16% वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। शेयर में नतीजों के बाद 3.36% की गिरावट आई, लेकिन लोकल टैरिफ से प्रेरित प्राइस और मार्जिन सुधार का फायदा उठाने के लिए SAIL को एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है। SAIL का P/E रेश्यो फिलहाल 32x है।
Vodafone Idea: कर्ज और घटते सब्सक्राइबर्स का बोझ
Macquarie ने Vodafone Idea पर 'अंडरपरफॉर्म' रेटिंग को बरकरार रखा है और टारगेट प्राइस ₹9 रखा है। कंपनी पर सरकारी बकाया (AGR और स्पेक्ट्रम ड्यूज) का भारी बोझ है, जो लगभग $16 बिलियन है। बैंक और फाइनेंशियल देनदारियां $400 मिलियन हैं, जबकि कैश बैलेंस $600 मिलियन है। Q4 FY26 में सब्सक्राइबर बेस में 100,000 की मामूली गिरावट आई, जो अब 193 मिलियन है। प्रति यूजर एवरेज रेवेन्यू (ARPU) 1.2% बढ़कर ₹174 प्रति माह हुआ है, जो अभी भी प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों से कम है। प्रमोटर ग्रुप द्वारा ₹470 करोड़ का फंडरेज केवल मामूली राहत देगा। कंपनी का नेगेटिव P/E रेश्यो बताता है कि यह अभी भी एक जोखिम भरा दांव है।
Delhivery: ग्रोथ अच्छी, पर वैल्यूएशन पर सवाल
UBS ने Delhivery के 'बाय' रेटिंग को ₹630 के टारगेट प्राइस के साथ बढ़ाया है। कंपनी ने Q4 FY26 में 30% साल-दर-साल बढ़कर ₹2,850 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो अनुमानों से बेहतर है। एक्सप्रेस और पार्ट ट्रक लोड (PTL) सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ और मार्जिन में लगातार सुधार से प्रॉफिटेबिलिटी भी उम्मीदों से बेहतर रही। हालांकि, कंपनी का वैल्यूएशन चिंता का विषय है। इसका TTM P/E रेश्यो 152x से 230x के बीच है, जो Blue Dart Express (45-52x) और Container Corporation (30.83x) जैसे साथियों की तुलना में बहुत अधिक है। 1-2% के कम ROE के बावजूद, निवेशक इसके भविष्य के बड़े ग्रोथ की उम्मीद लगा रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म्स अभी भी बुलिश हैं, लेकिन नतीजे आने के बाद शेयर में 4-8% तक की गिरावट देखी गई, जो एग्जीक्यूशन और मार्जिन दबाव के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है।